खुदाई में निकला विष्णु मंदिर
खुदाई में निकला विष्णु मंदिर

पेशावर/दक्षिण भारत। साल 1947 में भारत विभाजन ने हमसे इंसानी जानें ही नहीं, बल्कि संस्कृति और इतिहास का एक बड़ा हिस्सा भी छीन लिया। पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत जो आज आतंकवाद के लिए कुख्यात है, कुछ सदियों पहले यह बहुत शांत इलाका था और यहां हिंदू व बौद्ध मंदिरों में गूंजते मंत्र, प्रार्थनाएं और घंटियां लोगों के दिलों-दिमाग को शांति देते थे।

इन दिनों यहां पुरातत्वविद् इतिहास की परतें खोलने के लिए खुदाई में जुटे हैं। उन्हें इस खुदाई में कालचक्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। इनमें से एक है भगवान विष्णु का मंदिर, जिन्हें इतिहासकारों ने कम से कम 1,200 साल पुराना बताया है।

यह खुदाई खैबर पख्तूनख्वाह के बारीकोट खुंडई इलाके में हो रही है। इस दौरान यह विष्णु मंदिर और सनातन संस्कृति से संबंधित कई प्रतिमाएं, मांगलिक चिह्न पाए गए। खुदाई का नेतृत्व इटली के पुरातत्वविद् कर रहे हैं।

इस धरती से विष्णु मंदिर प्रकट हुआ तो वे भी हैरान रह गए। उन्होंने मंदिर से मिलीं सामग्री का अध्ययन कर पाया कि यह कम से कम 1,200 साल पुराना है। खुदाई से जुड़े एक पुरातत्वविद् ने बताया कि यह बड़ा मंदिर है।

इससे सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उस जमाने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे। यह क्षेत्र धन-धान्य से संपन्न रहा होगा, लेकिन बाद में यह हिंदूभूमि विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार, देश विभाजन और अब आतंकवाद के कारण श्रद्धालुओं को तरस रही है।

पुरातत्वविदों के अनुसार, यहां एक वाच टावर और जलसंग्रह का स्थान मिला है। चूंकि मंदिरों में भगवान का जलाभिषेक होता है। ऐसे में जलस्थान यह सिद्ध करता है कि उस समय के लोग भगवान में श्रद्धा रखने के साथ ही जलसंरक्षण का महत्व समझते थे।

मंदिर के निर्माण में पत्थर और पलस्तर का काम हुआ है। इसके अलावा संगमरमर की प्रतिमाएं मिली हैं, जो अध्यात्म के साथ इतिहास में झांकने का बड़ा स्रोत हो सकती हैं। मंदिर से ब्राह्मी में उत्कीर्ण शिलालेख बरामद हुए हैं।

पुरातत्वविदों की मानें तो इन पर राजा जयपालदेव का नाम उत्कीर्ण है। ये उस जमाने के हिंदू शासक थे। यहां वर्षों तक उनके वंश ने राज था और धर्म में गहरी श्रद्धा रखने के कारण मंदिरों का निर्माण कराया। अब तक इस मंदिर की आधी खुदाई हुई है। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि खुदाई पूरी होने तक इस मंदिर से सनातन धर्म, संस्कृति और इतिहास के और अनमोल चिह्न प्रकट हो सकते हैं। पाक में मंदिर मिलने की घटना का दूसरा पहलू यह बताता है कि इतने वर्षों में हमसे क्या-क्या छीन लिया गया।