सच में होते हैं एलियंस या सिर्फ एक भ्रम? यहां जानिए वैज्ञानिकों की राय

प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

मेलबर्न/द कन्वरसेशन। पेंटागन के अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना (यूएपी) टास्क फोर्स की ओर से इस महीने के अंत में जारी की जाने वाली एक अवर्गीकृत रिपोर्ट की सामग्री को लेकर एलियंस के होने और न होने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

दस्तावेज़, 25 जून को आने की उम्मीद है, माना जाता है कि इस दस्तावेज के जरिए इस बात का विस्तार से पता चल सकेगा कि अमेरिकी सरकार यूएपी-या, अधिक लोकप्रिय शब्द, यूएफओ के बारे में क्या जानती है।

हालांकि रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने हाल ही में जो सामग्री प्रकाशित की थी उसके बारे में दावा किया गया था कि वह उपरोक्त रिपोर्ट में वर्णित निष्कर्षों का पूर्वावलोकन है और इसे ऐसे अज्ञात अधिकारियों ने तैयार किया है जो रिपोर्ट की सामग्री से अवगत हैं।

टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट पिछले दो दशकों में यूएफओ देखे जाने की 120 से अधिक घटनाओं और एलियंस के पृथ्वी पर आने की संभावना के बीच कोई स्पष्ट संपर्क या संबंध प्रदान नहीं करती है।

यदि टाइम्स के सूत्रों पर विश्वास किया जाए, तो आकाश में कभी कभार दिखाई देने वाली अस्पष्ट सी वस्तु को एलियंस का साक्ष्य मान लेने का अभी भी कोई स्पष्ट कारण नहीं है। तो क्या इसका मतलब यह है कि एलियंस ब्रह्मांड में कहीं नहीं हैं? और अगर वे हैं, तो क्या हम उन्हें कभी ढूंढ पाएंगे? या हो सकता है कि वे हमसे इतने भिन्न हों कि किसी भी सार्थक ढंग से उन्हें ‘‘ढूंढना’’ असंभव है?

हमने इस बारे में पांच विशेषज्ञों से पूछा। पांच में से चार विशेषज्ञों ने कहा कि एलियंस मौजूद हैं।

यहां उनकी विस्तृत प्रतिक्रियाएं हैं: – जोंटी हॉर्नर, प्रोफेसर (खगोल भौतिकी), दक्षिणी क्वींसलैंड विश्वविद्यालय

मुझे लगता है कि इसका जवाब निश्चित रूप से हां होना चाहिए। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एलियंस हमारे इतने करीब हैं कि हम उन्हें खोज पाएं?

अंतरिक्ष अविश्वसनीय रूप से बड़ा है। पिछले कुछ दशकों में, हमने सीखा है कि ब्रह्मांड के लगभग हर तारे के ग्रह हैं। हमारी आकाशगंगा, मिल्की वे में 400 अरब तारे होने का अनुमान है। यदि उनमें से प्रत्येक के पास पांच ग्रह हैं, तो हमारे पास अकेले हमारी आकाशगंगा में दो खरब ग्रह होंगे। और हम जानते हैं कि आकाशगंगा में जितने ग्रह हैं, उससे कहीं अधिक आकाशगंगाएं ब्रह्मांड में हैं। हम यह तो मानते हैं कि एलियंस होते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि इसके प्रमाण खोजना आश्चर्यजनक रूप से मुश्किल होगा।

– स्टीवन टिंगे, जॉन कर्टिन विशिष्ट प्रोफेसर (रेडियो खगोल विज्ञान), कर्टिन विश्वविद्यालय

इसका जवाब हां है, लेकिन यह एक साहसिक दावा है। तो, आइए स्पष्ट करें कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं। एलियंस से हमारा मतलब हर उस तरह के जीवन से है जो हमारी पृथ्वी के अलावा किसी अन्य स्थान पर मौजूद है। वर्तमान में ‘जीवन’ की परिभाषा पर कोई विस्तृत सहमति नहीं है। यह एक बहुत ही जटिल अवधारणा है। लेकिन अगर हमें पृथ्वी के अलावा कहीं और बैक्टीरिया जैसा कुछ मिला, तो मैं इसे परग्रही जीवन के रूप में वर्गीकृत करूंगा।

ब्रह्मांड में सैकड़ों अरब आकाशगंगाएँ हैं, जिनमें से प्रत्येक अरबों और अरबों सितारों से मिलकर बनी हो सकती है। इनमें से अधिकांश सितारों में प्रत्येक में कम से कम एक ग्रह होता है। ये ग्रह प्रणाली ‘जीवन’ की उत्पत्ति के लिए आवश्यक माने जाने वाले सभी तत्वों सहित तत्वों के एक समृद्ध मिश्रण से बनी हैं। इसलिए, यह विश्वास करना कठिन है कि ‘जीवन’ की उत्पत्ति के लिए आवश्यक परिस्थितियों का मिश्रण केवल पृथ्वी पर हुआ ब्रह्मांड के खरबों अन्य ग्रहों पर नहीं।

लेकिन यह देखा जाना बाकी है कि क्या यह जीवन बैक्टीरिया की तरह है, या एक रोमांचक ‘‘तकनीकी रूप से उन्नत सभ्यता’’ है, जिससे हम संवाद कर सकते हैं। ऐसी विदेशी सभ्यताओं की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास चल रहा है जो हमारी तरह की तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जैसे कि शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप दूर की ग्रह प्रणालियों से रेडियो तरंग दैर्ध्य संचार भेज रहे हैं।

और फिर निश्चित रूप से, यह संभव है कि ‘जीवन’ की हमारी परिभाषा काफी संकीर्ण हो, और एलियंस – चाहे वे कहीं भी हों – कुछ अलग ही तरह के नियमों से बंधे हों।

– हेलेन मेनार्ड-केसली, वरिष्ठ उपकरण वैज्ञानिक, ऑस्ट्रेलियाई परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन

मेरी राय है कि यह केवल कुछ समय की बात है जब हम कुछ ऐसा ढूंढ लेंगे जो पृथ्वी के अलावा कहीं और जीव विज्ञान जैसा दिखता हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अपने सौर मंडल में तेजी से विभिन्न संभावित क्षेत्र ढूंढ रहे हैं, जहां जीवन के पनपने की परिस्थितियां हो सकती हैं।उदाहरण के लिए, यूरोपा और गेनीमेड (बृहस्पति के बड़े चंद्रमाओं में से दो) के बर्फ के नीचे के महासागरों पर विचार करें: ये ऐसे स्थान हैं जहां तापमान ठीक है, पानी और खनिजों तक भी पहुंच है। हम चीजों को पृथ्वी पर जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि निश्चित रूप से दूसरे ग्रहों पर जीवन हमारे अपने से बहुत अलग हो सकता है।

इसलिए मैं शनि के चंद्रमा टाइटन के और अन्वेषण को लेकर वास्तव में उत्साहित हूं। टाइटन की सतह पर दिलचस्प अणुओं की एक पूरी श्रृंखला है, साथ ही उनके परिवहन के लिए सक्रिय मौसम प्रणाली भी है – वह भी, हमारे सौर मंडल के भीतर। और हम जानते हैं कि हमारी आकाशगंगा के भीतर अन्य सौर मंडल भी हैं।

उपर्युक्त सभी को ध्यान में रखते हुए, यह वास्तव में निश्चित लगता है कि हम कहीं न कहीं कुछ सक्रिय जीवन खोज पाएंगे।

– रेबेका एलन, स्विनबर्न अंतरिक्ष कार्यालय परियोजना समन्वयक, स्विनबर्न प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

जवाब हां है, लेकिन वे शायद हमारे जैसे नहीं दिखते। अकेले हमारी आकाशगंगा में 100 अरब से अधिक ग्रह मौजूद हैं (लगभग छह अरब संभावित रूप से पृथ्वी की तरह हैं)। इसलिए, संभावना है कि जीवन कहीं और मौजूद है, लेकिन पुष्टि नहीं की गई है।

हालांकि, जब हम ‘एलियन’ शब्द सुनते हैं, तो आम तौर पर एक इनसान जैसी छवि दिमाग में आ जाती है। लेकिन पृथ्वी पर भी, जीवन का सबसे प्रमुख रूप बहुत पुराना, छोटा और अधिक लचीला है। मैं निश्चित रूप से सूक्ष्मजीवों के बारे में बात कर रहा हूं। ये ऐसी जगहों पर पर उत्पन्न होते हैं, जहां जीवन की कोई आशा नहीं होती, जैसे ज्वालामुखीय छिद्रों के आसपास कीचड़ में। ऐसे में मैं शर्त लगा सकता हूं कि एलियंस जीवन इन ‘चरमपंथियों’ के रूप में मौजूद है।

– मार्टिन वैन-क्रैनेंडोंक, प्रोफेसर और हैड ऑफ स्कूल, यूएनएसडब्ल्यू

इस प्रश्न का सरल उत्तर है नहीं। यदि हम विशुद्ध रूप से अनुभवजन्य डेटा का उपयोग करते हैं और मानते हैं कि प्रश्न पृथ्वी के बाहर किसी भी प्रकार के जीवन को संदर्भित करता है जो मानव गतिविधि से संबंधित नहीं है, तो उत्तर – जहां तक हम जानते हैं – नहीं होना चाहिए।

लेकिन, निश्चित रूप से, इस प्रश्न से संबंधित हमारा ज्ञान सीमित है; हमने जीवन के संकेतों के लिए ब्रह्मांड के हर कोने की जांच नहीं की है और हम यह भी नहीं जानते हैं कि किसी अन्य रासायनिक प्रणाली में जीवन क्या हो सकता है।