प्रतीकात्मक चित्र
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टोक्यो/दक्षिण भारत। कोरोना महामारी में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय चीन दूसरे देशों के लिए मुसीबतें खड़ी करने में व्यस्त है। इसी सिलसिले में उसका जापान के साथ एक नया विवाद शुरू हो गया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, जापानी अधिकारियों ने कहा कि उनके देश के उपग्रह के पास चीन और रूस के किलर सैटेलाइट देखे गए हैं। इस मामले पर अधिकारियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बीजिंग-मास्को जापानी उपग्रह को नष्ट करने के लिए अभ्यास कर रहे हैं।

इसका मतलब यह है कि अब तक चीन धरातल पर तो दूसरे देशों से भिड़ंत मोल लेता रहता था, इससे कई कदम आगे निकलते हुए उसने अंतरिक्ष में भी मोर्चा खोल दिया है। अगर चीन किसी के उपग्रह को नष्ट कर देता है तो उससे संबंधित देश को न केवल बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत पर भी पानी फिरता है।

इसके अलावा, उस उपग्रह से संबंधित गतिविधियां ठप पड़ सकती हैं, जिससे उस देश में लोगों को कामकाज में परेशानी और अफरा—तफरी जैसा माहौल पैदा हो सकता है। बता दें कि डिजिटल के दौर में उपग्रहों का बड़ा योगदान है। इनसे संचार से लेकर बैंकिंग और रक्षा गतिविधियों समेत कई कार्यों का संचालन किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, जापान के एक अधिकारी ने बताया कि चीन-रूस के उपग्रह जापानी सैन्य उपग्रह के बहुत नजदीक देखे गए थे। इसके बाद अमेरिका को सूचना दी गई, चूंकि जापान के पास चीन-रूस के उपग्रहों पर कड़ी नजर रखने की क्षमता मौजूद नहीं है।

बता दें कि अमेरिका भी पूर्व में रूस पर आरोप लगा चुका है कि उसने उपग्रह से सूचनाएं चुराने की कोशिश की थी। आरोपों के अनुसार, इस साल के शुरुआत में रूसी उपग्रह अमेरिकी उपग्रह के इतने नजदीक आ गया कि वह तस्वीरों की डिटेल चुराकर और उसे नुकसान पहुंचा सकता था।

उल्लेखनीय है कि भारत के पास भी अंतरिक्ष में मिसाइल से वार कर उपग्रह को मार गिराने की क्षमता है। भारत ने मार्च 2019 में उपग्रह भेदी परीक्षण किया जो सफल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित कर इस उपलब्धि की सूचना दी थी।