चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। कर्जे के बोझ तले बुरी तरह दबे आतंकी पाकिस्तान से उसके ‘सदाबहार’ दोस्त चीन ने भी किनारा करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान ने एक रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के लिए जब कर्जा मांगते हुए चीन के सामने हाथ फैलाया तो उसने टका-सा जवाब देते हुए कहा कि पहले अतिरिक्त गारंटी दो।

पाकिस्तान ने मेन लाइन रेलवे प्रोजेक्ट के लिए चीन से छह अरब डॉलर का कर्जा मांगा था। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने उक्त प्रोजेक्ट के लिए कर्जा देने को लेकर सहमति जताई है लेकिन इससे पहले अतिरिक्त गारंटी मांगी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 13 दिसंबर को मेन लाइन प्रोजेक्ट के संबंध में संयुक्त वित्तीय कमेटी की बैठक हुई तो मामला अतिरिक्त गारंटी पर अटक गया। चीन ने यह मुद्दा उठाया। हालांकि जो ब्योरा साझा किया गया, उसमें इसके इस्तावेज शामिल नहीं किए गए। इससे सवाल उठ रहे हैं कि कहीं चीन इस प्रोजेक्ट के नाम पर पाकिस्तान की जमीन पर कब्जा तो नहीं करना चाहता।

इस प्रोजेक्ट में पेशावर से कराची तक 1,872 किमी रेलमार्ग का दोहरीकरण, पटरियों की मरम्मत आदि काम शामिल हैं। यह मार्ग सीपेक के लिए भी बहुत खास माना जा रहा है जिसका चीन निर्माण कर रहा है।

चीन की इस नए प्रोजेक्ट में रुचि है लेकिन पाक की खराब आर्थिक स्थिति के कारण उसे यकीन नहीं है कि भविष्य में यह मुल्क उसका कर्जा चुका पाएगा। ऐसे में उसने अतिरिक्त गारंटी मांगी। कर्ज देने के मामले में चीन का रिकॉर्ड रहा है कि जो उसका पैसा नहीं चुका पाता, वह उसकी जमीन पर कब्जा कर लेता है। श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह इसका चर्चित उदाहरण है।