तालिबान का पूर्व कमांडर एहसानुल्लाह एहसान
तालिबान का पूर्व कमांडर एहसानुल्लाह एहसान

रावलपिंडी/दक्षिण भारत। पाकिस्तान की फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर लंबे समय से आतंकवाद फैलाने और विरोधियों की हत्या कराने के आरोप लगते रहे हैं। अब तालिबान के एक पूर्व कमांडर के बयान ने हलचल मचा दी है। इस शख्स ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान फौज के पास एक ऐसा दस्ता है जो अपने विरोधियों को मौत के घाट उतार देता है।

तालिबान के इस पूर्व कमांडर का नाम एहसानुल्लाह एहसान है। उसने एक वीडियो में ये बातें कबूली हैं। उसने बताया कि पाकिस्तान की मिलिटरी इंटेलिजेंस (एमआई) ने उसके सामने यह प्रस्ताव रखा था कि वह भी उस घातक दस्ते में शामिल होकर विरोधियों को ठिकाने लगाए।

इस दस्ते मेंं जैश, टीटीपी सहित विभिन्न आतंकवादी संगठनों के कई खूंखार आतंकी शामिल हैं जो अपने आकाओं के इशारे पर वहां हर किसी के खात्मे के लिए तैयार रहते हैं। एहसानुल्लाह ने बताया कि इस दस्ते का मकसद ऐसे लोगों को रास्ते से हटाना है जिनकी सूची पाकिस्तान फौज तैयार करती है। इन्हें दुश्मन घोषित कर मरवा दिया जाता है। हत्याओं के इन मामलों में जांच के नाम पर कुछ नहीं होता, चूंकि न्याय तंत्र भी फौज से खौफ खाता है।

एहसानुल्लाह ने यह भी कहा है कि वह बहुत जल्द उन लोगों के नामों का खुलासा कर देगा जिनके नाम फौज द्वारा तैयार की गई उक्त सूची में शामिल हैं। उसका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर एफएटीएफ की तलवार लटक रही है और वह आतंकवाद, धनशोधन जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान फौज का सबसे ज्यादा कहर बलोचिस्तान पर टूटा है जहां उसने अब तक हजारों स्थानीय लोगों की गुप्त रूप से हत्या करवा दी। ऐसे लोग अचानक लापता हो जाते हैं, फिर उनकी कोई खबर नहीं मिलती। कुछ मामलों में उनके शव बरामद होते हैं लेकिन ज्यादातर गुमनाम मौत मरते हैं और उनके परिजन थानों से लेकर नेताओं और अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन उन्हें कहीं इंसाफ नहीं मिलता।

एहसानुल्लाह ने कहा कि इस सूची में ज्यादातर पेशावर, क्वेटा (बलोचिस्तान की राजधानी) और मर्दान शहर के निवासियों के नाम थे। मुझे उन लोगों की सूची दिखाई गई, जिन्हें पाकिस्तान फौज खत्म करना चाहती थी। उनमें से कई खैबर पख्तूनख्वा के पश्तून और कुछ पत्रकार थे।

एहसानुल्लाह ने बताया कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में पहले से ही मौत के ऐसे कई दस्ते काम कर रहे हैं। खासतौर से बलोचिस्तान के इलाके में, जहां वे पाकिस्तान फौज के हुक्म पर किसी की भी हत्या करने से नहीं हिचकते।