जकार्ता में पाकिस्तान का दूतावास बेचने वाले पूर्व राजदूत सैयद मुस्तफा अनवर
जकार्ता में पाकिस्तान का दूतावास बेचने वाले पूर्व राजदूत सैयद मुस्तफा अनवर

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। इन दिनों पाकिस्तान के एक पूर्व राजदूत का कारनामा खूब चर्चा में है। दरअसल, उसने अपने कार्यकाल के दौरान दूतावास ही बेच डाला। पाकिस्तान सरकार को जब इसके बारे में पता चला तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अब मामले की फाइलें सरकारी दफ्तरों से लेकर अदालतों में घूम रही हैं और पूर्व राजदूत के खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद मुस्तफा अनवर ने यह कांड किया है। उन्हें पाकिस्तान सरकार ने इंडोनेशिया के जकार्ता में जब राजदूत बनाकर भेजा तो उन्होंने यहां आते ही दूतावास की इमारत को बेचने की कोशिशें शुरू कर दी।

मुस्तफा ने पाकिस्तान सरकार को इसकी भनक भी नहीं लगने दी और इंडोनेशिया के स्थानीय अखबारों में बिक्री के विज्ञापन छपवा दिए। बाद में खरीदार मिला तो राजदूत ने दूतावास का मोल लगाकर डॉलर बटोरे और अपनी राह ली।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के भ्रष्टाचार विरोधी निकाय ‘राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो’ (एनएबी) ने मुस्तफा के खिलाफ 2001-2002 में किए गए इस अपराध के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया गया है कि राजदूत ने अपने ही दूतावास की इमारत को कौड़ियों के भाव बेचकर सरकारी खजाने को करीब 13.20 लाख डॉलर का चूना लगा दिया।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पूर्व राजदूत ने चोरी-चुपके दूतावास बेचकर एनएबी की धारा 9(ए) 6 की धज्जियां उड़ा दीं। मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि मुस्तफा को यह दूतावास बेचने की इतनी ज्यादा जल्दी थी कि वे तैनाती के बाद इसे तुरंत ही बेचकर चले जाना चाहते थे। उन्होंने इतना बड़ा फैसला लिया लेकिन विदेश मंत्रालय तक को सूचना नहीं भेजी।

मामले का भंडाफोड़ होने के बाद मुस्तफा सोशल मीडिया में छाए हुए हैं। साथ ही यह मुद्दा उठाया जा रहा है कि मुस्तफा के फौजी कार्यकाल की जांच होनी चाहिए। हो सकता है कि उन्होंने ऐसा ही कोई कारनामा तब किया हो लेकिन उसकी फाइलें रद्दी के ढेर में पड़ी हों!

दूतावास मामले पर पाकिस्तान का उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि भ्रष्टाचार के इस केस पर फैसला लेने के लिए एनएबी जिम्मेदार है, जिसने काफी देरी की। उसके अधिकारी कार्रवाई करने में असमर्थ रहे। हालांकि, चर्चा यह भी है कि मामला एक पूर्व फौजी अधिकारी के भ्रष्टाचार से जुड़ा है तो इस पर कोई ठोस कार्रवाई होने की संभावना नहीं है।