ऑक्सफोर्ड विवि छात्रसंघ की अध्यक्ष बनीं पहली भारतीय महिला

रश्मि सावंत। फोटो स्रोत: LinkedIn
रश्मि सावंत। फोटो स्रोत: LinkedIn

कर्नाटक की रश्मि सावंत की ऑक्सफोर्ड विवि छात्रसंघ चुनाव में उल्लेखनीय जीत

ऑक्सफोर्ड/दक्षिण भारत। कर्नाटक की रश्मि सावंत ने कभी सोचा नहीं था कि पिछले साल जनवरी में वे दुनिया के जिस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में दाखिले के लिए आवेदन कर रही थीं, इस साल फरवरी में वे उसी संस्थान के छात्र संघ का चुनाव जीतकर खबरों का हिस्सा बन जाएंगी।

मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में चार वर्ष का स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाली रश्मि सावंत को सात महीने पहले ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी में दाखिला मिला तो लगा जैसे सपना सच हो गया।

लेकिन यूनीवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में हजारों छात्रों ने उन्हें वोट देकर अध्यक्ष पद के चुनाव में विजयी बना दिया और उनकी आंखों को कुछ और सपने देखने की वजह दे दी। यह पहला मौका है जब भारत की किसी महिला ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर कब्जा किया है।

कुछ बेहतर करने की चाह
रश्मि सावंत का कहना है कि विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को अपने लक्ष्य को पहचानने के बाद उस पर से अपना ध्यान भटकने नहीं देना चाहिए और पूरी शिद्दत से उसे पाने की कोशिश में लग जाना चाहिए, लेकिन उसके लिए सब कुछ त्याग देने और 24 घंटे पढ़ाई करते रहना भी सही नहीं है।

रश्मि का मानना है कि अपनी रुचि की तमाम गतिविधियों में हिस्सा लेना और जीवन के हर क्षेत्र में कुछ बेहतर करने की चाह रखना आपको अपनी मंजिल के करीब ले जाता है।

डिजिटल समाधान की हिमायत
रश्मि के पिता दिनेश सावंत उडुपी के नजदीक परकाला में अपना कारोबार करते हैं, जबकि मां वत्सला सावंत गृहिणी हैं। रश्मि की प्रारंभिक शिक्षा मणिपाल और उडुपी में ही हुई और उन्होंने 2016-2020 के बीच एमआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया।

इस दौरान वे छात्र परिषद की तकनीकी सचिव रहीं और मणिपाल हैकेथान की शुरुआत में उनका बड़ा योगदान रहा, जिसमें सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटल समाधान की हिमायत की गई है।

तीन प्रतिद्वंद्वी मिलकर भी नहीं कर सके बराबरी
ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के लिनाकर कॉलेज में एनर्जी सिस्टम्स में एमएससी की पढ़ाई कर रहीं रश्मि ने छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना प्रचार अभियान चलाया और उन्हें जितने वोट मिले, उनके तीन प्रतिद्वंद्वी मिलकर भी उतने वोट हासिल नहीं कर पाए।