आतंकवादी हाफिज सईद
आतंकवादी हाफिज सईद

लाहौर/दक्षिण भारत। आतंकवाद को लेकर दुनिया में बदनाम हुए पाकिस्तान ने अब अपनी छवि सुधारने के लिए नया नाटक शुरू कर दिया है। उसने आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में हाफिज सईद की जमात-उद-दावा (जेयूडी) के प्रवक्ता को 32 साल कैद की सजा सुनाई है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यहां आतंकवाद रोधी अदालत ने हाफिज सईद के बहनोई समेत जेयूडी के तीन सदस्यों को आतंकवाद के वित्तपोषण मामलों में दोषी ठहराया और सजा का ऐलान किया।

बता दें कि हाफिज सईद मुंबई 26/11 हमलों का मुख्य षड्यंत्रकर्ता है। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवाद विरोधी अदालत के जज एजाज अहमद बुट्टर ने जमात-उद-दावा के प्रवक्ता याह्या मुजाहिद को 32 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रोफेसर ज़फ़र इकबाल और प्रोफेसर हाफ़िज़ अब्दुल रहमान मक्की (सईद के रिश्तेदार) को दो मामलों में क्रमशः 16 और एक साल कैद की सजा सुनाई गई है।

आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े अन्य मामलों में, जमात-उद-दावा के दो अन्य नेताओं अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद और लुकमान शाह को अन्य मामलों में दोषी ठहराया गया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को 16 नवंबर को अपने गवाह पेश करने को कहा है।

क्यों उठाया यह कदम?
आखिर पाकिस्तान ने यह कदम क्यों उठाया? चूंकि अतीत में उसकी हरकतों को देख आतंकवादियों के खिलाफ पाक अदालतों की कार्रवाई पर किसी को भरोसा नहीं होता। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि वह एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है।

लिहाजा उसे दुनिया को दिखाने के लिए यह नाटक करना पड़ रहा है​ ताकि एफएटीएफ को यह दिखा सके कि वह आतंकवाद के खिलाफ बहुत सख्त कार्रवाई कर रहा है। ग्रे लिस्ट में होने से उसकी अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंची है। ऐसे में अगर वह ब्लैक लिस्ट में चला जाता है तो पहले से ही कंगाली की कगार पर पहुंची पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था धराशायी हो सकती है।