चीनी ड्रैगन
चीनी ड्रैगन

कनबेरा/दक्षिण भारत। अक्सर पाकिस्तानी मीडिया इस बात का जिक्र करता है कि पाक-चीन दोस्ती शहद से ज्यादा मीठी और हिमालय से भी ज्यादा ऊंची है। हालांकि, इस बीच चीन ने सीपेक और अन्य परियोजनाओं के नाम पर पाक को इतना ज्यादा कर्जा दे दिया है कि उसे चुकाना बहुत मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि चीन का इतिहास यही कहता है कि यह देश दूसरों की जमीन पर नजरें गड़ाए रहता है और मौका मिलते ही उसे हड़प लेता है।

ताजा मामला ऑस्ट्रेलिया के एक टापू का है। इसका एक हिस्सा चीनी कंपनी ने 99 साल की लीज पर लिया है। चीनी कंपनी के पास इस टापू के आते ही यहां जोर-जबरदस्ती शुरू हो गई है। कल तक स्थानीय लोग यहां आसानी से आ सकते थे लेकिन अब सिर्फ चीनी लोगों को ही इसकी इजाजत है यानी ऑस्ट्रेलिया के नागरिक अपने ही देश की जमीन पर कदम नहीं रख सकते।

एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी ने इस टापू को लीज पर लिया है, उसका नाम चाइना ब्लूम है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें केस्विक टापू के इन हिस्सों में जाने से रोका जा रहा है। यहां खूबसूरत पार्क और सार्वजनिक बीच हैं जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं।

यहां एक दंपति किराए के मकान में रह रहा था लेकिन अब उन्हें यहां से निकल जाने के लिए कह दिया गया है। स्थानीय लोगों ने चीनी कंपनी पर और भी आरोप लगाए हैं, जैसे उन्हें अपने मकान को किराए पर देने से मना किया जा रहा है। कल तक लोग यहां शांति और खुशी से जीवन बिता रहे थे, लेकिन अब महसूस होता है कि वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की तानाशाही में कैद हैं।

बताया गया है कि इस इलाके को अब सिर्फ चीनी पर्यटकों के लिए ही खोला जा रहा है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसके मुख्य द्वार को गैर-चीनियों के लिए बंद करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि चीनी कंपनी को टापू के सिर्फ 20 प्रतिशत हिस्से की लीज हासिल है। बाकी जमीन ऑस्ट्रेलियाई सरकार की है, लेकिन चीन अपना असल रंग दिखाने से बाज़ नहीं आ रहा है।