प्रतीकात्मक चित्र
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न्यूयॉर्क/भाषा। भारत सरकार की छह लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की योजना एक ऐसी परियोजना है जिसमें कोविड-19 के बाद की दुनिया में देश को बेहतर तरीके से तैयार करने पर बल दिया जा रहा है। यह सूचनाओं और सेवाओं तक पहुंच को बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित करती है। यह बात संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कही।

भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के छह लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की परियोजना की घोषणा की थी जिसे अगले 1,000 दिनों में पूरा किया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रशासक ए. स्टेनर ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं फाइबर ऑप्टिक केबल कनेक्टिविटी पर प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत करता हूं। संकट के इस समय में हमें उस परिमाण की पीढ़ीगत परियोजनाओं की न केवल कल्पना करने की जरूरत है बल्कि वास्तव में कार्यान्वित और वित्तपोषित करने की भी जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोविड-19 के बाद के समय के लिए रणनीति के लिहाज से यह आगे बढ़ने के लिए बेहतर है।’

उन्होंने कहा, ‘वे अपने स्वभाव के हिसाब से गरीबों को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं क्योंकि गांवों को जोड़कर हम सूचना और सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रगति करेंगे।’ स्टेनर ने कहा, ‘हम भारत को सॉफ्टवेयर विकास, प्रौद्योगिकी से विकास के परिणामों को जोड़ने में अग्रणी देशों में से एक मानते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘कुछ काम हम भारतीय निजी क्षेत्र के साथ ही नीति आयोग सहित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के साथ कर रहे हैं, यह समझने के लिए कि कैसे क्षितिज को बहुत तेज़ी से विस्तारित किया जा सकता है, यह कुछ ऐसा है जिसकी हम वास्तव में सराहना करते हैं।’

स्टेनर ने कहा कि वह यूएनडीपी के प्रमुख के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस के साथ मिलकर लगातार देशों से कोविड-19 के मद्देनजर उत्पन्न संकट के इस समय का लाभ उठाने की अपील कर रहे हैं।