क्या बोलेंगे बाइडन? तय करेगा भारतवंशी शब्दों का ‘जादूगर’

विनय रेड्डी। फोटो स्रोत: The Ohio State University Moritz College of Law, Facebook Page
विनय रेड्डी। फोटो स्रोत: The Ohio State University Moritz College of Law, Facebook Page

.. राजीव शर्मा ..

वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जब 20 जनवरी को जो बाइडन ने शपथ ली तो उन पर दुनियाभर की निगाहें थीं। हर कोई यह जानना चाहता था कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अपने संबोधन में क्या कहेंगे। बाइडन ने जो कुछ कहा, वह सोशल मीडिया से लेकर मुख्य धारा के मीडिया में प्रसारित, प्रकाशित हुआ।

वास्तव में यह आवाज बाइडन की थी लेकिन उसके पीछे जो शब्द थे, वे एक भारतवंशी की लेखनी की उपज थे। विनय रेड्डी, भारतीय मूल के एक ऐसे युवा लेखक जिनके शब्द अमेरिकी राष्ट्रपति की जुबान पर चढ़ते हैं तो पूरी दुनिया सुनती है। वे जो बाइडन के सबसे विश्वस्त साथियों में शामिल किए जाते हैं।

देशवासियों के नाम संदेश हो या सेना को आह्वान, विदेशी प्रतिनिधियों से संवाद हो या किसी नए कानून की व्याख्या, अब विनय रेड्डी तय करेंगे कि बाइडन क्या बोलेंगे। वे अमेरिकी राष्ट्रपति की भाषण लेखक टीम के ​डायरेक्टर नियुक्त किए गए हैं।

काबिलियत से पहुंचे व्हाइट हाउस
भारत के तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले विनय अपनी काबिलियत के दम पर आज व्हाइट हाउस तक पहुंच गए हैं लेकिन वे निजी प्रचार से दूर रहते हैं। इस समय जहां हर कोई सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाकर अपने विचार, तस्वीरें पोस्ट करना चाहता है, विनय का ट्विटर अकाउंट भी नहीं है।

जो बाइडन के शपथ लेने के बाद विनय का नाम अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आया तो बड़ी संख्या में लोग उनके बारे में सर्च करने लगे। उन्हें उस वक्त निराशा हाथ लगी जब विनय की न कोई वेबसाइट मिली और न ही कोई सोशल मीडिया अकाउंट।

भारत से गहरा रिश्ता
विनय का परिवार तेलंगाना में करीमनगर जिले के पोथीरेड्डीपेट गांव से ताल्लुक रखता है। विनय के पिता का नाम नारायण रेड्डी और मां का नाम विजया रेड्डी है। उनके दादा तिरुपति रेड्डी अपने गांव के सरपंच रह चुके हैं। नारायण रेड्डी ने शुरुआती पढ़ाई पोथीरेड्डीपेट से की थी। उन्होंने हैदराबाद से एमबीबीएस किया। फिर 1970 में बेहतर भविष्य की तलाश उन्हें अमेरिका ले आई।

यहां विनय का जन्म ओहायो में हुआ। विनय ने ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लॉ से पढ़ाई की है। वे मियामी यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं। वे स्कूली पढ़ाई से ही बहुत प्रतिभाशाली थे। हालांकि तब उनके परिवार में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक दिन विनय अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भाषण लिखेंगे।

शब्दों का चयन बेमिसाल
विनय को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उनके द्वारा शब्दों का चयन बेमिसाल है। वे एक-एक शब्द बहुत सावधानी से चुनते हैं और इस तरह वाक्य बनाते हैं कि पढ़ने/सुनने वाला नज़रअंदाज नहीं कर सकता। विनय के स्कूल शिक्षक उनके लेखन की तारीफ करते थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण लेखक होना काफी जिम्मेदारी का काम होता है। इसके लिए अमेरिकी इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं की गहरी समझ होनी चाहिए। सामयिक घटनाओं पर नजर के साथ लेखन में पारंगत होना चाहिए। इतना ही नहीं, भाषण लेखक को यह पता होना चाहिए कि किसी विषय पर राष्ट्रपति किस तरह से अभिव्यक्ति देते हैं। उसे उनकी शैली सहित विचारों को शब्दों में पिरोना होता है। बाइडन को इन तमाम जिम्मेदारियों के लिए विनय सबसे बेहतरीन लगे और उन्हें अपने शब्दों की कमान सौंप दी।

.. तो इसलिए बाइडन की पसंद विनय
राष्ट्रपति जो बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से विनय का परिचय नया नहीं है। जब बाइडन ओबामा के दूसरे कार्यकाल में उपराष्ट्रपति थे, उन्होंने विनय को अपना भाषण लेखक नियुक्त किया था। विनय की प्रतिभा से प्रभावित बाइडन ने उन्हें अपने साथ रखा।

शब्दों पर तालियां बजा रही थी जनता
हाल में जब वे राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रचार में व्यस्त थे और ट्रंप प्रशासन की खामियां गिनाते हुए अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे थे तो ये शब्द किसी और के नहीं, विनय के थे। विनय के शब्दों पर अमेरिकी जनता तालियां बजा रही थी। उनकी लेखनी का जादू ऐसा चला कि आखिरकार बाइडन राष्ट्रपति बनने में सफल हो गए।

विनय और उनका परिवार अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। वे हर साल भारत स्थित अपने गांव आते हैं और पुरखों के घर में रहकर पुरानी यादें ताजा करते हैं। जो बाइडन के शपथग्रहण समारोह को उनके गांव में कई लोगों ने सिर्फ इस वजह से देखा क्योंकि उसके शब्द उनकी धरती के बेटे ने लिखे थे।