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आत्मनिर्भर भारत पूर्ण आजादी का मूल स्वरूप ही है, जहां हम किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगे: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईआईटी, कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरी बातों में आपको अधीरता नजर आ रही होगी लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी इसी तरह आत्मनिर्भर भारत के लिए अधीर बनें

कानपुर/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आईआईटी, कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज कानपुर के लिए दोहरी खुशी का दिन है। आज एक तरफ कानपुर को मेट्रो जैसी सुविधा मिल रही है। वहीं दूसरी ओर टेक्नोलॉजी की दुनिया को आईआईटी, कानपुर से आप जैसे अनमोल उपहार भी मिल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जिन विद्यार्थियों को सम्मान मिला है, उन्हें बहुत-बहुत बधाई। आज आप जहां पहुंचे हैं, आपने जो योग्यता हासिल की है, उसके पीछे आपके माता-पिता, आपके परिवार के लोग और आपके अध्यापकों जैसे अनेकों लोग होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब से आप इस संस्थान में आए हैं तब से अपने आप में एक बड़े बदलाव का अनुभव कर रहे होंगे। जब आप पहुंचे, तो आपको अज्ञात का भय अवश्य हुआ होगा। आईआईटी, कानपुर ने आपको इससे बाहर निकाला है और आपको एक विशाल कैनवास दिया है।

आपका प्रशिक्षण, कौशल और आज का ज्ञान निश्चित रूप से व्यावहारिक लक्ष्यों में अपना स्थान बनाने में आपकी सहायता करेगा। आपने यहां जो व्यक्तित्व विकसित किया है, वह आपको समग्र रूप से समाज की सेवा करने और अपने राष्ट्र को सशक्त बनाने की शक्ति देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कानपुर भारत के उन चुनिंदा शहरों में से है, जो इतना डाइवर्स है। सत्ती चौरा घाट से लेकर मदारी पासी तक, नाना साहब से लेकर बटुकेश्वर दत्त तक, इस शहर की सैर करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के गौरव की, उस गौरवशाली अतीत की सैर कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1930 में दांडी मार्च ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक दिशा दी थी। उस युग के युवा प्रेरित थे और उन्होंने 1947 में भारत की स्वतंत्रता को परिभाषित किया - यह उनके लिए उनका स्वर्णिम चरण था। आप अपने जीवन के ऐसे ही सुनहरे युग में कदम रख रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव की इस घड़ी में जब आप आईआईटी की लेगसी लेकर निकल रहे हैं तो उन सपनों को भी लेकर निकले कि 2047 में भारत कैसा होगा। आने वाले 25 सालों में भारत की विकास यात्रा की बागडोर आपको ही संभालनी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौर, यह 21वीं सदी, पूरी तरह प्रौद्योगिकी संचालित है। इस दशक में भी टेक्नोलॉजी अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा और बढ़ाने वाली है। बिना टेक्नोलॉजी के जीवन अब एक तरह से अधूरा ही होगा। यह जीवन और टेक्नोलॉजी की स्पर्धा का युग है और मुझे विश्वास है कि इसमें आप जरूर आगे निकलेंगे। आपने अपनी जवानी के इतने महत्वपूर्ण वर्ष टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट बनने में लगाए हैं। आपके लिए इससे बड़ा अवसर क्या होगा? आपके पास तो भारत के साथ ही पूरे विश्व में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में योगदान करने का बहुत बड़ा अवसर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले अगर सोच काम चलाने की होती थी, तो आज सोच कुछ कर गुजरने की, काम करके नतीजे लाने की है। पहले अगर समस्याओं से पीछा छुड़ाने की कोशिश होती थी, तो आज समस्याओं के समाधान के लिए संकल्प लिए जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरी बातों में आपको अधीरता नजर आ रही होगी लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी इसी तरह आत्मनिर्भर भारत के लिए अधीर बनें। आत्मनिर्भर भारत, पूर्ण आजादी का मूल स्वरूप ही है, जहां हम किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगे।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था- 'प्रत्येक राष्ट्र के पास देने के लिए एक संदेश है, एक मिशन है जिसे पूरा करना है, एक नियति तक पहुंचना है।' यदि हम आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तो हमारा देश अपने लक्ष्य कैसे पूरे करेगा, अपनी नियति तक कैसे पहुंचेगा? आप यह कर सकते हैं, मेरा आप पर भरोसा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के इस 75वें साल में हमारे पास 75 से अधिक यूनिकोर्न्स हैं, 50 हजार से अधिक स्टार्टअप्स हैं। इनमें से 10 हजार स्टार्टअप तो केवल पिछले छह महीनों में आएं हैं। कौन भारतीय नहीं चाहेगा कि भारत की कंपनियां ग्लोबल बनें, भारत के प्रॉडक्ट ग्लोबल बनें।
जो आईआईटीज को जानता है, यहां के टैलेंट को जानता है, यहां के प्रोफेसर्स की मेहनत को जानता है, वो यह विश्वास करता है कि ये आईआईटी के नौजवान जरूर करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से शुरू हुई यात्रा में आपको सहूलियत के लिए शॉर्टकट भी बहुत लोग बताएंगे। लेकिन मेरी सलाह यही होगी कि आप कम्फर्ट मत चुनना, चैलेंज जरूर चुनना। क्योंकि, आप चाहें या न चाहें, जीवन में चुनौतियां आनी ही हैं। जो लोग उनसे भागते हैं, वो उनका शिकार बन जाते हैं।

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