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सतर्कता बरतें
लोग यह मान बैठे हैं कि कोरोना चला गया है
 
क्या हम चाहेंगे कि अपने देश में भी पाबंदियां लगाने की नौबत आए?

भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में यह कहना कि 'कोरोना की चुनौती अभी पूरी तरह टली नहीं है' विचारणीय है। पिछले साल इन दिनों देशवासी कोरोना मामलों में तेज उछाल से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण परेशान थे। ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीमीटर, बेड, दवाइयां, फल ... और हर चीज के मनमाने दाम का नज़ारा आंखों के सामने आता है तो सिहरन-सी दौड़ जाती है।

निस्संदेह देश ने कोरोना रोधी टीके से संक्रमण के आंकड़े को काबू में रखा है। इसके लिए वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, चिकित्साकर्मियों ने बहुत मेहनत की है। आम जनता ने नियमों का पालन करते हुए बड़ी कुर्बानियां दी हैं लेकिन अब पहले जैसी गंभीरता दिखाई नहीं देती। बाजारों में बहुत कम लोग मास्क लगाए रहते हैं। बसों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्थाओं में भी यही स्थिति है। हाथों की स्वच्छता नदारद होती जा रही है। सोशल डिस्टेंसिंग बीते दिनों की बात हो गई है। लोग यह मान बैठे हैं कि कोरोना चला गया है।

वास्तव में कोरोना कहीं नहीं गया। वह कुछ काबू में आया है, पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हमारी लापरवाही के कारण मामले फिर से बढ़ते जा रहे हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पड़ोसी देश चीन, जहां से कोरोना वायरस आया, में संक्रमण के मामलों ने सरकार के माथे पर पसीना ला दिया है। उसने कई शहरों में पाबंदियां लगा दी हैं। बड़ी संख्या में जांचें की जा रही हैं। लोग घरों में बैठने को मजबूर हैं।

क्या हम चाहेंगे कि अपने देश में भी पाबंदियां लगाने की नौबत आए? कोरोना महामारी ने कितने ही परिवारों को अपनों से जुदा कर दिया। रोजगार का नुकसान हुआ। कई लोग अब तक मानसिक तनाव से बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे में हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि समय रहते संभल जाएं। कोरोना को काबू में रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करें। कोरोना रोधी टीका अवश्य लगवाएं। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, स्वच्छता जैसे नियमों का कड़ाई से पालन करें। इस समय यही वो तरीका है जिससे देश कोरोना से सुरक्षित रहेगा।

अगर एक बार संक्रमण के मामलों ने रफ्तार पकड़ ली तो इसे तुरंत काबू में लाना बहुत मुश्किल होगा। देश में सरकारी अस्पतालों के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने का सामर्थ्य सबमें नहीं है। महंगाई ने पहले ही घर का बजट बिगाड़ रखा है। गैस सिलेंडर, दूध, राशन, पेट्रोल-डीजल, रोजमर्रा की जरूरत का सामान ... कहीं भी राहत नहीं है। रोजगार की स्थिति उत्साहजनक नहीं है। देश का साधारण एवं मध्यम वर्ग किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी खींच रहा है।

इसलिए सबका दायित्व है कि सतर्क हो जाएं, कोरोना को हराने के लिए गंभीरता लाएं। देशवासियों ने सामूहिक प्रयासों से इतनी बड़ी महामारी को नियंत्रित किया है। वे इस समाप्त भी करेंगे। इस यज्ञ में पूर्ण मनोयोग से सामूहिक आहुति देनी होगी। स्वच्छता और सतर्कता के अस्त्र से कोरोना का संहार करना होगा। हम विजयी होंगे, अवश्य होंगे।

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