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आतंकवाद की नई लहर से खफा पाकिस्तान की जनता सड़कों पर उतरकर बोली - हमारी जान बचाओ
इलाके के लोग पिछले कुछ समय से आतंकवाद की बढ़ती लहर के खिलाफ विरोध को लेकर रैलियां कर रहे हैं
 
बड़ी संख्या में नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों, स्थानीय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। पाकिस्तान ने जिन आतंकवादियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल के लिए पाला, वे अब उसे ही तबाह करने को आमादा हैं। आए दिन बम धमाकों और अफगानिस्तान से आतंकी हमलों से खफा जनता भी सड़कों पर उतर आई है।

खैबर पख्तूनख्वा की स्वात घाटी में सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार को इलाके में आतंकवाद की हालिया लहर के खिलाफ सड़कों पर उतरकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आतंकवाद का सिलसिला जारी रहने पर भारी विरोध की चेतावनी दी।

इस सप्ताह की शुरुआत में, स्वात घाटी में कबाल तहसील के घोलो कंडाव इलाके में रिमोट से नियंत्रित बम की चपेट में आने से अमन समिति के पूर्व प्रमुख और दो पुलिसकर्मियों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी।

अमन समिति के पूर्व प्रमुख इदरीस खान, दो पुलिस गार्ड रमैल और तौहीद, और एक बच्चा कोटकेय से बांदाई गांव जा रहे थे। वे इस दौरान सड़क पर लगे बम में धमाका होने से मारे गए। धमाके में दो राहगीरों की भी मौत हो गई। बाद में दो लाशें और मिलीं।

हमले का दावा प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने किया था, जिसमें कहा गया था कि इदरीस लगभग 13 वर्षों से उनकी हिट-लिस्ट में थे।

इलाके के लोग पिछले कुछ समय से आतंकवाद की बढ़ती लहर के खिलाफ विरोध को लेकर रैलियां कर रहे हैं।

इलाके में बढ़ते आतंकवाद के खिलाफ चिंता जताते हुए प्रदर्शनकारी नमाज के बाद कबाल चौक पर जमा हुए। वे हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर लिखा था, ‘हमें शांति चाहिए, हमारी जान बचाओ’। इसी तरह एक बैनर पर नारा था, ‘हमें बंदूकों के बजाय किताबें चाहिएं।’

बड़ी संख्या में नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों, स्थानीय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

स्वात में अवामी नेशनल पार्टी के नेता रहमत अली खान ने कहा कि नागरिकों ने आतंक का प्रकोप देखा, जो हाल के दिनों में स्वात के साथ कभी नहीं हुआ था।

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