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दोहरी नेतृत्व प्रणाली अब प्रभावी नहीं है, पनीरसेल्वम पार्टी संयोजक नहीं रहे: अन्नाद्रमुक
अन्नाद्रमुक ने पिछले साल दोहरी नेतृत्व प्रणाली को बरकरार रखने और उसे मजबूती प्रदान करने के लिए नियमों में संशोधन किया था
 
षणमुगम के बयान से साफ होता है कि पलानीस्वामी का गुट उन्हें 11 जुलाई को फिर से होने वाली आम परिषद की बैठक में सर्वोच्च नेता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर अडिग है

चेन्नई/भाषा। अन्नाद्रमुक के ईके पलानीस्वामी गुट ने शुक्रवार को कहा कि समन्वयक ओ. पनीरसेल्वम और संयुक्त समन्वयक ईके पलानीस्वामी को अलग-अलग शक्तियां प्रदान करने वाली दोहरी नेतृत्व प्रणाली अब प्रभावी नहीं है। एक दिन पहले हुई अन्नाद्रमुक की आम परिषद की बैठक में पलानीस्वामी गुट के एकल नेतृत्व पर अड़े रहने के बाद यह घोषणा की गई है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पलानीस्वामी के विश्वस्त सीवी षणमुगम ने कहा कि दोहरे नेतृत्व को लेकर एक दिसंबर 2021 को पार्टी नियमों में हुए संशोधनों को 23 जून, 2022 को हुई आम परिषद की बैठक में मंजूरी नहीं मिली है। अन्नाद्रमुक ने पिछले साल दोहरी नेतृत्व प्रणाली को बरकरार रखने और उसे मजबूती प्रदान करने के लिए नियमों में संशोधन किया था। नियमों में संशोधन के बाद पनीरसेल्वम को निर्विरोध समन्वयक और पलानीस्वामी को संयुक्त समन्वयक घोषित किया गया था।

षणमुगम ने संवाददाताओं से कहा कि इस तरह के संशोधनों ने यह अनिवार्य कर दिया था कि समन्वयक और संयुक्त समन्वयक के दो शीर्ष पदों पर प्रत्याशियों का चुनाव पार्टी के प्राथमिक सदस्यों के वोट से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चूंकि पार्टी के दो शीर्ष पदों से संबंधित इन संशोधनों को बृहस्पतिवार को आम परिषद की तरफ से मान्यता और समर्थन नहीं मिला, इसलिए ये शीर्ष दो पद अब समाप्त हो गए हैं। लिहाजा पनीरसेल्वम अब समन्वयक और पलानीस्वामी संयुक्त-समन्वयक नहीं हैं।

पूर्व कानून मंत्री षणमुगम ने पार्टी की नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि दोनों अपने अपने अन्य पदों पनीरसेल्वम (कोषाध्यक्ष) और पलानीस्वामी (मुख्यालय सचिव) पर बने रहेंगे।

षणमुगम के बयान से साफ होता है कि पलानीस्वामी का गुट उन्हें 11 जुलाई को फिर से होने वाली आम परिषद की बैठक में सर्वोच्च नेता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर अडिग है।

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