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भद्रेशदास स्वामी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
अपने संबोधन में राम माधव ने भद्रेशदास स्वामीजी के सम्मान को भारतीय संस्कृति का सम्मान बताया
 
भद्रेशदास स्वामीजी ने उपनिषद, गीता आदि शास्त्रों पर संस्कृत में भाष्य की रचना की है

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। महामहोपाध्याय पू. भद्रेशदास स्वामीजी को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया है। यह आईसीपीआर का सर्वोच्च सम्मान है।

इसके लिए आईसीपीआर और बीएपीएस स्वामीनारायण शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय दार्शनिक संगोष्ठी का आयोजन अक्षरधाम मंदिर परिसर में हुआ था। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव राम माधव थे। उनके अलावा आईसीपीआर अध्यक्ष आरसी सिन्हा, तिरुपति संस्कृत विवि के कुलपति मुरलीधर शर्मा, कालिदास विवि, नागपुर के कुलपति श्रीनिवास बरखेड़ी, अखिल भारतीय दर्शन परिषद के प्रोफेसर जटाशंकर तिवारी, आईसीपीआर सदस्य सचिव सच्चिदानंद मिश्रा आदि विद्वान उपस्थित थे। संगोष्ठी में विभिन्न शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। वहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विवि, वाराणसी के प्रोफेसर रामकिशोर त्रिपाठी को 'वेदांत मार्तंड' उपाधि से विभूषित किया गया है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत अक्षरधाम मंदिर प्रभारी मुनिवत्सल स्वामीजी ने किया। 

अपने संबोधन में राम माधव ने भद्रेशदास स्वामीजी के सम्मान को भारतीय संस्कृति का सम्मान बताया। वहीं, भद्रेशदास स्वामीजी ने उक्त सम्मान का कारण और हकदार गुरुकृपा को बताया। 

उच्चकोटि के विद्वान स्वामीजी
उल्लेखनीय है कि भद्रेशदास स्वामीजी ने उपनिषद, गीता आदि शास्त्रों पर संस्कृत में भाष्य की रचना की है। वे दर्शनशास्त्र के साथ ही समाज में मानवता एवं नैतिकता के प्रसार के लिए प्रयासरत हैं। स्वामीजी के शब्दों पर देश-​विदेश में अध्ययन एवं चिंतन किया जाता है। 

भद्रेशदास स्वामीजी का नाम संस्कृत एवं अध्यात्म के उच्चकोटि के विद्वानों में शामिल किया जाता है। स्वामीजी ने 1996 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी और भारतीय विद्या भवन, मुंबई, से संस्कृत और षट् दर्शन में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की थी। उन्होंने 2005 में भगवद्गीता पर शोध प्रबंध प्रस्तुत कर कर्नाटक विश्वविद्यालय से पीएचडी की।

स्वामीजी को वर्ष 2010 में डीलिट और कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, नागपुर द्वारा 'महामहोपाध्याय' उपाधि से सम्मानित किया गया था। मैसूरु विश्वविद्यालय ने उन्हें स्वामीनारायण वेदांत पर उनके योगदान के लिए वर्ष 2013 में 'प्रोफेसर जीएम मेमोरियल अवॉर्ड' और 'दर्शनकेसरी अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया था। 

देश-विदेश में प्रवचन
स्वामीजी ने वर्ष 2007 में स्वामीनारायण भाष्यम् पूरा किया, जो प्रस्थानत्रयी पर पांच-खंड का शास्त्रीय संस्कृत भाष्य है। सोशल मीडिया के माध्यम से उनके प्रवचन भारत के अलावा विदेशों में भी सुने जाते हैं।

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