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कर्नाटकः सरकारी धन का दुरुपयोग करने पर 5 लोगों को सात साल का कठोर कारावास, 5 करोड़ रु. से ज्यादा का जुर्माना
आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे
 
अगर वे जुर्माना नहीं भरेंगे तो दो साल और जेल में बिताने होंगे

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। विशेष सीबीआई अदालत ने कर्नाटक सरकार के एक निकाय से संबंधित धन की हेराफेरी के मामले में पांच लोगों को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर कुल 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया है।

न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने 8 सितंबर को सुनाए गए फैसले में पांच लोगों कबाली आनंद, एचएस नागलिंगास्वामी, चंद्रशेखर, एचके नागराज और केबी हर्षन को दोषी ठहराया। उन पर कुल 5,02,75,000 रुपए का जुर्माना लगाया है।

इसमें से 5.02 करोड़ रुपए मांड्या शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे, जिसे इन पांच लोगों ने धोखा दिया था। शेष राशि को जब्त कर लिया जाएगा। अगर वे जुर्माना नहीं भरेंगे तो दो साल और जेल में बिताने होंगे।

कर्नाटक सरकार के आदेश के आधार पर सीबीआई और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 18 मार्च, 2014 को मामला दर्ज किया था। उक्त पांच लोगों को 22 जुलाई, 2015 को जमानत पर रिहा किया गया था।

उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।

बता दें कि कबाली आनंद लौह अयस्क का कारोबार करता हैं। नागलिंगास्वामी एक फर्म का सीईओ है। चंद्रशेखर एक रियल एस्टेट फर्म का मालिक है, जबकि नागराज एमयूडीए में प्रथम श्रेणी सहायक और हर्षन आनंद का कर्मचारी है।

मामले में, इन लोगों ने धोखाधड़ी से वाउचर और चेक भरे। फिर प्राधिकरण के नाम पर निवेश करने के लिए इंडियन बैंक, मांड्या शाखा के पक्ष में एमयूडीए के तत्कालीन आयुक्त द्वारा जारी किए गए प्रत्येक एक करोड़ रुपए की राशि के पांच चेकों का दुरुपयोग किया।

अदालत ने कहा कि पांचों ने आकाश एंटरप्राइजेज के खाते में पैसे जमा कराने की साजिश रची और एमयूडीए को 5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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