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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है?
खराब नींद लोगों के मूड और व्यवहार को भी प्रभावित करती है
 
मस्तिष्क के सामान्य कामकाज को बनाए रखने के लिए नींद एक महत्वपूर्ण घटक है

कैम्ब्रिज/शंघाई/द कन्वरसेशन। हम में से ज्यादातर लोगों को अगर रात में ठीक से नींद न आए तो कुछ भी सोचने में परेशानी होती है-कुछ अनमना सा महसूस होता है और इसका स्कूल, विश्वविद्यालय या काम में हमारे सामान्य कामकाज पर असर पड़ता है। आप महसूस करेंगे कि कम सोने से आप कहीं भी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं या आपकी याद्दाश्त आपका साथ छोड़ने लगती है। यह सच है कि नींद न आने का सिलसिला अगर दशकों तक चले तो यह संभावित रूप से संज्ञानात्मक गिरावट का कारण बन सकती है।

खराब नींद लोगों के मूड और व्यवहार को भी प्रभावित करती है, चाहे वे छोटे शिशु हों या बड़े वयस्क। तो हमारे मस्तिष्क को लंबी अवधि में ठीक से काम करने के लिए कितनी नींद की आवश्यकता होती है? नेचर एजिंग में प्रकाशित हमारा नया शोध अध्ययन इस सवाल का जवाब खोजने का प्रयास करता है।

मस्तिष्क के सामान्य कामकाज को बनाए रखने के लिए नींद एक महत्वपूर्ण घटक है। नींद के दौरान मस्तिष्क खुद को पुनर्गठित और रिचार्ज करता है। साथ ही जहरीले अपशिष्ट उपोत्पादों को हटाने और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के लिए, नींद ‘यादें संजाए रखने’ के लिए भी महत्वपूर्ण है, नींद के दौरान हमारे अनुभवों के आधार पर नए मेमोरी सेगमेंट दीर्घकालिक स्मृति में स्थानांतरित हो जाते हैं।

नींद की एक इष्टतम मात्रा और गुणवत्ता हमें अधिक ऊर्जा और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। यह हमें हमारी रचनात्मकता और सोच को विकसित करने में भी मदद देती है।

तीन से 12 महीने की उम्र के बच्चों को देखते हुए, शोधकर्ताओं ने ध्यान दिया है कि बेहतर नींद जीवन के पहले वर्ष में बेहतर व्यवहार परिणामों से जुड़ी होती है, जैसे कि नई परिस्थितियों के अनुकूल होने या भावनाओं को कुशलता से नियंत्रित करने में सक्षम होना।

यह ‘संज्ञानात्मक लचीलेपन’ (आसानी से परिप्रेक्ष्य बदलने की हमारी क्षमता) सहित अनुभूति के लिए महत्वपूर्ण प्रारंभिक निर्माण खंड हैं, और बाद के जीवन में हमारे बेहतर स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं।

नींद की नियमितता मस्तिष्क के ‘डिफॉल्ट मोड नेटवर्क’ (डीएमएन) से जुड़ी हुई प्रतीत होती है, जिसमें ऐसे क्षेत्र शामिल होते हैं जो जागते समय सक्रिय होते हैं लेकिन किसी विशिष्ट कार्य में नहीं लगे होते हैं, जैसे कि आराम करते समय हमारा दिमाग चलता रहता है। इस नेटवर्क में ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो संज्ञानात्मक कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, जैसे पोस्टीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स (जो संज्ञानात्मक कार्यों के दौरान निष्क्रिय हो जाता है), पार्श्विका लोब (जो संवेदी जानकारी को संसाधित करता है) और फ्रंटल कॉर्टेक्स (योजना और जटिल संज्ञान में शामिल)।

ऐसे संकेत हैं कि, किशोरों और युवा वयस्कों में, इस नेटवर्क के भीतर कनेक्टिविटी में बदलाव के साथ खराब नींद को जोड़ा जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि किशोरावस्था और शुरुआती युवा वयस्कता में हमारा दिमाग अभी भी विकास के क्रम में हैं। इसलिए इस नेटवर्क में व्यवधान का अनुभूति पर प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि एकाग्रता और स्मृति-आधारित प्रसंस्करण में हस्तक्षेप, साथ ही साथ अधिक उन्नत संज्ञानात्मक प्रसंस्करण।

नींद के पैटर्न में बदलाव, जिसमें नींद आने और लम्बे समय तक सोने में कठिनाई शामिल है, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। ये नींद की गड़बड़ी वृद्ध लोगों में संज्ञानात्मक गिरावट और मानसिक विकारों का एक बड़ा कारण होती है।

सही मात्रा में नींद लेना
हमारे अध्ययन का उद्देश्य नींद, अनुभूति और बेहतर स्वास्थ्य के बीच की कड़ी को बेहतर ढंग से समझना था। हमने पाया कि अपर्याप्त और अत्यधिक नींद दोनों ने यूके बायोबैंक के लगभग 500,000 वयस्कों के संज्ञानात्मक प्रदर्शन को प्रभावित करने में योगदान दिया। इस शोध में मध्यम आयु वर्ग से वृद्धावस्था के लोगों को शामिल किया गया था। हालांकि, हमने बच्चों और किशोरों का अध्ययन नहीं किया, और चूंकि उनके दिमाग का विकास हो रहा है, इसलिए उनके लिए नींद की आवश्यक अवधि अलग हो सकती है।

हमारी प्रमुख खोज यह थी कि प्रति रात सात घंटे की नींद इष्टतम थी, इससे कम या ज्यादा सोने से अनुभूति और मानसिक स्वास्थ्य को कम लाभ मिलते हैं। वास्तव में, हमने पाया कि जो लोग सात घंटे सोते थे, उन्होंने कम या अधिक सोने वालों की तुलना में संज्ञानात्मक परीक्षणों (प्रोसेसिंग गति, दृश्य ध्यान और स्मृति सहित) पर - औसतन - बेहतर प्रदर्शन किया। सामान्य लोगों को भी अवधि में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव के बिना, लगातार सात घंटे की नींद की आवश्यकता होती है।

हम सभी नींद की कमी के लिए थोड़ा अलग तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं। हमने पाया कि नींद की अवधि, अनुभूति और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध आनुवंशिकी और मस्तिष्क संरचना पर निर्भर करता है। हमने देखा कि नींद की कमी से सबसे अधिक प्रभावित मस्तिष्क क्षेत्रों में हिप्पोकैम्पस शामिल है, जो सीखने और स्मृति में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है।

नींद हमारे दिमाग को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह दूसरी तरह से भी काम कर सकती है। खराब नींद की वजह से सोने और जागने के नियमन से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्रों में सिकुड़न आ सकती है जो बाद के जीवन में नींद की समस्याओं में योगदान करती है। उदाहरण के लिए, यह मेलाटोनिन के उत्पादन और स्राव को कम कर सकता है, एक हार्मोन जो वृद्ध वयस्कों में नींद के चक्र को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह खोज अन्य सबूतों का समर्थन करती प्रतीत होती है जो बताती है कि नींद की अवधि और अल्जाइमर रोग और मनोभ्रंश के विकास के जोखिम के बीच एक संबंध है।

हालांकि सात घंटे की नींद मनोभ्रंश से बचाव के लिए इष्टतम है, हमारे अध्ययन से पता चलता है कि पर्याप्त नींद लेने से स्मृति की रक्षा करके मनोभ्रंश के लक्षणों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। यह मानसिक विकारों और मनोभ्रंश वाले वृद्ध रोगियों में उनकी संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य में सुधार के लिए नींद की अवधि की निगरानी के महत्व पर प्रकाश डालता है।

तो हम अपने दैनिक जीवन में अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या कर सकते हैं?

एक अच्छी शुरुआत यह सुनिश्चित करना है कि आपके बेडरूम में तापमान और वेंटिलेशन अच्छा है - यह ठंडा और हवादार होना चाहिए। आपको सोने से पहले बहुत अधिक शराब के सेवन और थ्रिलर या अन्य रोमांचक सामग्री देखने से भी बचना चाहिए। आदर्श रूप से, जब आप सोने की कोशिश कर रहे हों तो आपको शांत और आराम की स्थिति में होना चाहिए। कुछ सुखद और आरामदेह चीज़ों के बारे में सोचना, जैसे पिछली बार जब आप समुद्र तट पर थे, कई लोगों के लिए काम करता है।

तकनीकी समाधान जैसे ऐप या उपकरण मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ नींद पर नज़र रखने और नींद की अवधि की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी फायदेमंद हो सकते हैं। जीवन का आनंद लेने और रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए, आप अपने स्वयं के नींद पैटर्न की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि आप नियमित रूप से सात घंटे की नींद ले रहे हैं।

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