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यह जनशक्ति की ही ताकत है कि भारत 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ सका: मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैक्सीन की 140 करोड़ डोज के पड़ाव को पार करना, प्रत्येक भारतवासी की अपनी उपलब्धि है
 
हम हर मुश्किल समय में एक दूसरे के साथ, एक परिवार की तरह खड़े रहे

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों के नाम संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस समय आप 2021 की विदाई और 2022 के स्वागत की तैयारी में जुटे ही होंगे। नए साल पर हर व्यक्ति, हर संस्था, आने वाले साल में कुछ और बेहतर करने, बेहतर बनने के संकल्प लेते हैं।

यह जनशक्ति की ही ताकत है, सबका प्रयास है कि भारत 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ सका। हम हर मुश्किल समय में एक दूसरे के साथ, एक परिवार की तरह खड़े रहे। अपने मोहल्ले या शहर में किसी की मदद करना हो, जिससे जो बना, उससे ज्यादा करने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैक्सीन की 140 करोड़ डोज के पड़ाव को पार करना, प्रत्येक भारतवासी की अपनी उपलब्धि है। यह जो नया ओमिक्रॉन वैरिएंट आया है, उसका अध्ययन हमारे वैज्ञानिक लगातार कर रहे हैं। हर रोज नया डेटा उन्हें मिल रहा है, उनके सुझावों पर काम हो रहा है। ऐसे में स्वयं की सजगता, स्वयं का अनुशासन, कोरोना के इस वैरिएंट के खिलाफ देश की बहुत बड़ी शक्ति है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मां भारती की सेवा में लगे अनेक जीवन आकाश की इन बुलंदियों को रोज गर्व से छूते हैं, हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। ऐसा ही जीवन रहा ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का। वरुण सिंह, उस हेलीकॉप्टर को उड़ा रहे थे, जो इस महीने तमिलनाडु में हादसे का शिकार हो गया। उस हादसे में, हमने देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत कई वीरों को खो दिया। वरुण सिंह भी मौत से कई दिन तक जांबाजी से लड़े, लेकिन फिर वो भी हमें छोड़कर चले गए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वरुण जब अस्पताल में थे, उस समय मैंने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा देखा, जो मेरे हृदय को छू गया। इस साल अगस्त में ही उन्हें शौर्य चक्र दिया गया था। इस सम्मान के बाद उन्होंने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी को पढ़कर मेरे मन में पहला विचार यही आया कि सफलता के शीर्ष पर पहुंच कर भी वे जड़ों को सींचना नहीं भूले। दूसरा कि जब उनके पास सेलेब्रेट करने का समय था, तो उन्होंने आने वाली पीढ़ियों की चिंता की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर साल मैं ऐसे ही विषयों पर विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पर चर्चा करता हूं। इस साल भी परीक्षाओं से पहले मैं विद्यार्थियों के साथ चर्चा करने की योजना बना रहा हूं। इस कार्यक्रम के लिए दो दिन बाद 28 दिसंबर से http://MyGov.in पर रजिस्ट्रेशन भी शुरू होने जा रहा है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं लखनऊ के रहने वाले नीलेशजी की एक पोस्ट की भी चर्चा करना चाहूंगा। ये ड्रोन शो लखनऊ के रजिडेंसी क्षेत्र में आयोजित किया गया था। ड्रोन शो में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अलग-अलग पहलुओं को जीवंत बनाया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा भारत कई अनेक असाधारण प्रतिभाओं से संपन्न है। विट्ठलाचार्यजी इसकी मिसाल है कि जब बात अपने सपने पूरे करने की हो, तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। अपने जीवनभर की कमाई लगाकर उन्होंने लाइब्रेरी की शुरुआत की। इस लाइब्रेरी में करीब 2 लाख पुस्तकें हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि व्यक्तित्व भी संवारती हैं, जीवन को भी गढ़ती हैं। मैं 'मन की बात' के श्रोताओ से कहूंगा कि आप इस वर्ष की अपनी उन 5 किताबों के बारे में बताएं, जो आपकी पसंदीदा रही हैं। इस तरह से आप दूसरे पाठकों को अच्छी किताबें चुनने में भी मदद कर सकेंगे।

आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। अलग-अलग देशों के लोग ना सिर्फ हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं बल्कि उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों का एक अनूठा अभियान चला रखा है। इस अभियान में लोग स्वेच्छा से अपनी एयरगन सरेंडर कर रहे हैं। ताकि पक्षियों का अधाधुंध शिकार रुक सके। पिछले कुछ महीनों में पहाड़ से मैदानी इलाकों तक लोगों ने इसे खुले दिल से अपनाया है

पहले सरकारी दफ्तरों में पुरानी फाइलों का कितना ढेर रहता था। आज से सरकार ने पुराने तौर-तरीकों को बदलना शुरू किया है। हमारे सरकारी विभाग भी स्वच्छता जैसे विषय पर इतने इनोवेटिव हो सकते हैं। कुछ साल पहले तक किसी को इसका भरोसा भी नहीं होता था। 

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