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अफवाह पर अंकुश
उच्च शिक्षित लोग भी ऐसी अफवाहों पर विश्वास कर लेते हैं
 
देखते ही देखते फेक न्यूज एक वॉट्सऐप ग्रुप से दूसरे ग्रुप में वायरल होने लगती है

सोशल मीडिया पर ‘बच्चा चोरी’ के नाम पर फैलाई जा रही अफवाह कुछ शरारती तत्त्वों का कृत्य है, लेकिन इसकी चपेट में कई लोग आ सकते हैं। समय रहते ऐसी पोस्ट्स और उन्हें शेयर करने वाले यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। इस संबंध में उडुपी के एसपी द्वारा जारी चेतावनी प्रासंगिक है। आमतौर पर लोगों को मालूम ही नहीं होता कि वे जो पोस्ट शेयर कर रहे हैं, वह फर्जी भी हो सकती है। उन्हें यही लगता है कि वे सामाजिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैला रहे हैं, लेकिन असल में वे कुछ शरारती तत्त्वों की मंशा पूरी कर रहे होते हैं।

 यह सब इस वजह से भी हो रहा है, क्योंकि अभी असल ख़बर और ‘फेक न्यूज’ के बोध का भी अभाव है। उच्च शिक्षित लोग भी ऐसी अफवाहों पर विश्वास कर लेते हैं और देखते ही देखते फेक न्यूज एक वॉट्सऐप ग्रुप से दूसरे ग्रुप में वायरल होने लगती है। इसका परिणाम कितना घातक हो सकता है, इसकी एक झलक दिल्ली के बवाना में देखने को मिली, जहां एक महिला अपने बच्चे को लेकर बस में सफर कर रही थी तो लोगों ने उसे बच्चा चोर समझ लिया। यही नहीं, वे उसके साथ अभद्रता करने लगे, उसकी गोद से बच्चे को छीन लिया। कुछ लोग सोशल मीडिया पर प्रचार पाने की मंशा से वीडियो बनाने लगे।

जब यह वीडियो वायरल हुआ तो अफवाह को और बढ़ावा मिला कि सच में ऐसी गैंग गली-गली घूम रही है। बाद में पता चला कि महिला उस बच्चे की मां थी। यह घटना मॉब लिंचिंग में भी तब्दील हो सकती थी। कई लोग पुराने वीडियो को नई घटना बताकर शेयर कर रहे हैं। वॉट्सऐप पर बहुत लोगों के पास ऐसे मैसेज आ चुके हैं, जिनमें दावा किया गया है कि ‘आजकल साधुओं के वेश में एक गिरोह सक्रिय है, जो मौका पाते ही छोटे बच्चों को उठा ले जाता है। फिर उनके अंग निकालकर बेच देता है! इसलिए बच्चों का ख्याल रखें!’

इसमें कोई संदेह नहीं कि छोटे बच्चों की सुरक्षा का खास ख्याल रखना चाहिए और देश में अपहरण की घटनाएं भी होती हैं, लेकिन इसका यह अर्थ तो नहीं कि हर गली-मोहल्ले में ऐसे गिरोह घूम रहे हैं। उडुपी के एसपी ने उचित ही कहा है कि जनता को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। अगर उन्हें कुछ संदिग्ध लगता है तो पुलिस को सूचित करें। पुलिस उसकी पड़ताल करेगी और सच में ही किसी बच्चे का अपहरण करके ले जाया जा रहा है तो उचित कार्रवाई करेगी।

ऐसी अपील उन जिलों के पुलिस अधिकारियों को तो अवश्य करनी चाहिए, जहां ये अफवाहें ज्यादा फैल रही हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाए। एक वायरल वीडियो में तो पुलिस अफसर को यह कहते दिखा दिया कि ‘जब भी कोई फेरीवाला, कबाड़ी आदि आए तो दरवाजा न खोलें, बल्कि हल्ला करके उसे भगा दें। घर में कुत्ता हो तो उसे खोल दें ...।’ इस तरह भय का माहौल बनाया जा रहा है। हालांकि जब यह वीडियो साइबर सेल तक पहुंचा तो इसे फेक करार दिया गया। वीडियो में अधिकारी के बोल और आवाज में तालमेल नहीं दिख रहा था, जिससे स्पष्ट है कि आवाज बाद में डाली गई है।

आम जनता इतनी गहराई से पड़ताल नहीं करती, क्योंकि उससे अपील की जाती है कि ‘मैसेज को जंगल की आग तरह फैला दें’, और वे फैला देते हैं। उसका नतीजा सच में जंगल की आग जैसा हो सकता है, इसलिए ऐसे मैसेज से सावधान रहें और उन्हें शेयर न करें। कुछ भी संदिग्ध लगे तो पुलिस को सूचित करना बेहतर है।

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