logo
संपूर्ण संते - बैक टू नेचर में छाए कई राज्यों के कला-शिल्प
यह हस्तनिर्मित देसी शिल्प, पेंटिंग और हस्तशिल्प व दस्तकारी वस्त्रों को प्रदर्शित करने का 10 दिवसीय कार्यक्रम है
 
इसका आगाज 9 सितंबर को हो चुका है और यह 18 सितंबर तक चलेगा

चेन्नई/दक्षिण भारत। संपूर्ण संते - बैक टू नेचर के भव्य आयोजन में 21 राज्यों के 90 से अधिक शिल्प समूह अपनी प्रतिभा और सामान का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनके प्रति लोगों का खास आकर्षण है।

आयोजकों ने बताया कि यह हस्तनिर्मित देसी शिल्प, पेंटिंग और हस्तशिल्प व दस्तकारी वस्त्रों को प्रदर्शित करने का 10 दिवसीय कार्यक्रम है। इसका आगाज 9 सितंबर को हो चुका है और यह 18 सितंबर तक चलेगा।

आयोजन स्थल तिरुवन्मियूर में कलाक्षेत्र रोड, पंबन स्वामीगल मंदिर के सामने सीईआरसी कैंपस है। यहां मधुबनी पेंटिंग, पेपर मेकिंग और धागे व मनके के आभूषण, लम्बानी आदिवासी बुनाई आदि के शिल्प प्रदर्शन के अलावा पारंपरिक खान-पान भी है।

बाजार का आकर्षण सभी 10 दिनों के लिए कलाकारों के विभिन्न नृत्य और वर्कशॉप भी हैं। नृत्य प्रदर्शन के लिए समय सुबह 11 बजे से शाम 7.30 बजे तक है। प्रवेश और कार पार्किंग निशुल्क है।

इस तरह चेन्नई अपने ‘संते’ के 16वें संस्करण का गवाह बनेगा। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन हर संस्करण के साथ ज्यादा लोकप्रिय होता जा रहा है। अब ‘संते’ का बेंगलूरु, चेन्नई, मुंबई, पुणे, कोयंबटूर और हैदराबाद जैसे शहरों में बेसब्री से इंतजार किया जाता है।

Photo: SAMPOORN “SANTHE”

संते स्वदेशी तकनीक, बनावट और डिजाइन का खजाना पेश करता है। इसके साथ ही बाजार परंपरा और आधुनिकता का प्रतीक है, जो कपड़ा, यार्डेज, सॉफ्ट फर्निशिंग, एक्सेसरीज, ज्वैलरी (सिल्वर), खिलौने और चमड़े के प्रॉडक्ट्स से लेकर मिट्टी के बर्तनों, पेंटिंग और होम फर्निशिंग तक का शानदार कलेक्शन पेश करता है।

यहां कला प्रेमियों के लिए बुने हुए टसर, चंदेरी, साउथ कॉटन, खादी, कच्छी, राजस्थानी पट्टू, ऑर्गेनिक पेन कलमकारी, अकोला, अजरक और कांचीवरम प्रिंट के साथ कोटा डोरिया, शिबोरी वर्क समेत कई चीजें हैं। इसके अलावा उत्तराखंड के जैविक उत्पाद और 5 अद्भुत बीजों से जैविक खाद, पौधे और सहायक उपकरण होंगे।

<