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कर्नाटक पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा फिर से आयोजित करने का फैसला, मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार
‘यह स्पष्ट है कि कई परीक्षा केंद्रों पर कदाचार हुए'
 
इस पृष्ठभूमि में चर्चा के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने और इसे दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है

बेंगलूरु/भाषा। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में 545 पुलिस उप निरीक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की गई परीक्षा रद्द करने और इसे दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है।

उन्होंने इस कथित भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी और अन्य संदिग्धों को पुणे से गिरफ्तार कर लिये जाने की भी घोषणा की।

मंत्री ने कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें संलिप्त लोगों को कठोर सजा दिलाने का आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार इस तरह के कदाचार को नियंत्रित करने के लिए और अधिक कठोर कानून लाने की सोच रही है।

ज्ञानेंद्र ने कहा, ‘पुलिस भर्ती घोटाले की मुख्य आरोपी दिव्या हागारगी को सद्दाम (चालक), सुरेश और कालिदास (दोनों सहायक) सहित अन्य के साथ पुणे से हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है, उन्हें कर्नाटक लाया गया है।’

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘यह स्पष्ट है कि कई परीक्षा केंद्रों पर कदाचार हुए, यहां तक कि बेंगलूरु में भी। इस पृष्ठभूमि में चर्चा के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने और इसे दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है।’

मामले की जांच कर रही कर्नाटक पुलिस का अपराध जांच विभाग दिव्या को कलबुर्गी ले आया है। बताया जाता है कि दिव्या भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध है।

दिव्या पिछले साल अक्टूबर में हुई एक लिखित परीक्षा और भर्ती में धांधली करने में कथित तौर पर संलिप्त थी। परीक्षा में अनियमितता के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने सीआईडी जांच का आदेश दिया।

बताया जाता है कि यह कथित अनियमितता कलबुर्गी स्थित ज्ञान ज्योति इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुई थी जिसे दिव्या संचालित करती है। घोटाले की बात सामने आने के बाद वह अपने अन्य सहयोगियों के साथ 18 दिनों से फरार थी।

मंत्री ने कहा, ‘परीक्षा में ब्लूटूथ का भी (कदाचार के लिए) इस्तेमाल किया गया था, उनकी भी गहन जांच की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि घोटाले में शामिल किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा, चाहे वह नेता, कारोबारी या प्रभावशाली व्यक्ति ही क्यों ना हो।

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