उच्चतम न्यायालय
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नई दिल्ली/भाषा। केंद्र ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि हमारे स्वास्थ्यकर्मी ‘कोरोना योद्धा’ हैं और उनके वेतन में कटौती, भुगतान में विलंब, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता या किराए के मकान से बेदखल किए जाने जैसी शिकायतों के समाधान के लिए उन्हें हेल्पलाइन मुहैया कराई जाएगी।

न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने इन समस्याओं को लेकर दायर याचिकाओं पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद इस मामले का निस्तारण कर दिया।

स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याओं की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित करते हुये यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन (यूएनए) और इंडियन प्रफेशनल नर्सेज एसोसिएशन (आईएनए) ने याचिकाएं दायर की थीं। इनमें कोरोना वायरस महामारी से स्वास्थ्यकर्मियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर उत्पन्न जोखिम को देखते हुए राष्ट्रीय कोविड-19 प्रबंधन प्रोटोकाल तैयार करने का अनुरोध किया गया था।

यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सुभाष चंद्रन केआर ने कहा कि उनके संगठन से संबंद्ध नर्सें देश में 400 से ज्यादा अस्पतालों में काम कर रही हैं और इनमें से अधिकांश के वेतन में 50 प्रतिशत तक की कटौती की गई है या फिर वेतन के भुगतान में विलंब हो रहा है।

उन्होंने कहा कि समुचित सुरक्षा उपकरण के अभाव में 150 से 200 नर्सें कोविड-19 का शिकार हो गई हैं और 600 से 700 स्वास्थ्यकर्मियों को पृथक कक्षों में रखा गया है। केन्द्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से जंग करने वाले हमारे योद्धा हैं और सरकार उनकी शिकायतों के समाधान के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय इन स्वास्थ्यकर्मियों की शिकायतों और दो घंटे के भीतर उनके समाधान के लिये हेल्पलाइन स्थापित करेगी जहां वे अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल का यह कथन दर्ज करने के बाद यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन और इंडियन प्रफेशनल नर्सेज एसोसिएशन की याचिका का निस्तारण कर दिया।

यूएनए ने अपनी याचिका में कहा था कि महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली, कर्नाटक आदि राज्यों में नर्स, चिकित्सक और दूसरे कर्मचारी इस संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इस महामारी से निबटने की तैयारियों में कमी की वजह से मुंबई सेंट्रल में वॉकहार्ट अस्पताल की 10 नर्सें इस संक्रमण का शिकार हो गईं। इस वायरस को फैलने से रोकने के इरादे से अस्पताल की लगभग सभी 265 नर्सों को अब निगरानी में रखा गया है।

आईएनए की याचिका में कोरोना वायरस के पृथक वार्ड में काम करने वाले प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।