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प्रधानमंत्री ने जयपुर के ‘सिपेट’ का उद्घाटन किया, 4 चिकित्सा महाविद्यालयों की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने कहा- देश के स्वास्थ्य सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करने के लिए  एक राष्ट्रीय अप्रोच, एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर काम किया
 

आयुष्मान भारत योजना से ही अभी तक राजस्थान के लगभग 3.50 लाख लोगों का मुफ्त इलाज हो चुका है। गांव, देहात में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने वाले लगभग 2,500 हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर आज राजस्थान में काम करना शुरू कर चुके हैं।

नई दिल्ली/जयपुर/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने गुरुवार को राजस्थान के जयपुर स्थित पेट्रोरसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) का उद्घाटन किया। साथ ही, बांसवाड़ा, सिरोही, हनुमानगढ़ और दौसा जिलों में चार नए चिकित्सा महाविद्यालयों की आधारशिला भी रखी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेस के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में रिमोट का बटन दबाकर सीआईपीईटी यानी ‘सिपेट’ का उद्घाटन और चारों चिकित्सा महाविद्यालयों का शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सौ साल की सबसे बड़ी महामारी ने दुनिया के हेल्थ सेक्टर के सामने अनेक चुनौतियां खड़ी कर दी। हर देश अपने-अपने तरीके से इस संकट से निपटने में जुटा है, भारत ने इस आपदा में आत्मनिर्भरता, अपने सामर्थ्य में बढ़ोतरी का संकल्प लिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान में 4 नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण के कार्य का प्रारंभ और जयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स टेक्नोलॉजी का उद्घाटन इसी दिशा में एक अहम कदम है। मैं राजस्थान के सभी नागरिकों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब ये कार्यक्रम हो रहा है, तब जयपुर सहित देश के 10 सीआईपीईटी सेंटर्स में प्लास्टिक और उससे जुड़े वेस्ट मैनेजेंट रूल्स को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चल रहा है। इस पहल के लिए भी मैं देश के सभी गणमान्य नागरिकों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेडिकल शिक्षा के मामले में बीते दो दशक के अथक प्रयासों से गुजरात ने मेडिकल सीटों में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री के रूप में देश के हेल्थ सेक्टर में मुझे जो कमियां अनुभव होती थी, बीते छह-सात वर्षों से उनको दूर करने की निरंतर कोशिश की जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के स्वास्थ्य सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करने के लिए हमने एक राष्ट्रीय अप्रोच, एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति पर काम किया। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर आयुष्मान भारत और अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तक, ऐसे अनेक प्रयास इसी का हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से ही अभी तक राजस्थान के लगभग 3.50 लाख लोगों का मुफ्त इलाज हो चुका है। गांव, देहात में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने वाले लगभग 2,500 हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर आज राजस्थान में काम करना शुरू कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे एम्स हो, मेडिकल कॉलेज हो या फिर एम्स जैसे सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल हों, इनका नेटवर्क देश के कोने-कोने तक तेज़ी से फैलाना बहुत ज़रूरी है। आज हम संतोष के साथ कह सकते हैं कि 6 एम्स से आगे बढ़कर आज भारत 22 से ज्यादा एम्स के सशक्त नेटवर्क की तरफ बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन छह-सात सालों में 170 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुके हैं और 100 से ज्यादा नए मेडिकल कॉलेज पर काम तेज़ी से चल रहा है। साल 2014 में देश में मेडिकल की अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की कुल सीटें 82 हजार के करीब थीं। आज इनकी संख्या बढ़कर 1 लाख 40 हजार सीट तक पहुंच रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन अभियान की सफलता इसी का प्रतिबिंब है। आज भारत में कोरोना वैक्सीन की 88 करोड़ से अधिक डोज लग चुकी है। मेडिकल शिक्षा की इस तेज प्रगति का बहुत बड़ा लाभ राजस्थान को भी मिला है। राजस्थान में इस दौरान मेडिकल सीटों में दोगुनी से भी अधिक बढ़ोतरी हुई है। यूजी सीटें 2,000 से बढ़कर 4,000 से ज्यादा हुई हैं। पीजी सीटें राजस्थान में एक हजार से भी कम थीं जो आज 2,100 तक पहुंच गई हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के इस अमृतकाल में उच्च स्तर का कौशल, न सिर्फ भारत की ताकत बढ़ाएगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे उद्योगों में से एक, पेट्रो-केमिकल इंडस्ट्री के लिए, स्किल्ड मैनपावर, आज की आवश्यकता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव और गरीब परिवारों से आने वाले युवाओं के लिए सिर्फ अंग्रेजी भाषा में मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन की पढ़ाई एक और बाधा रही है। अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई का भी मार्ग बना है।