कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। क्या देश-दुनिया में तेजी से प्रसार कर कई लोगों की सांसें छीन चुके कोरोना वायरस की पकड़ अब कमजोर हो रही है? संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद जिस तरह बड़ी संख्या में लोग स्वस्थ हो रहे हैं और मृत्यु दर में कमी आई है, उसके आधार पर वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि कोरोना अपना जोर खो रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का मानना है कि धीरे-धीरे कोरोना वायरस कमजोर होता जाएगा और महामारी के शुरुआत में इस वायरस की जैसी मारक क्षमता थी, वह मंद पड़ जाएगी। वैज्ञानिकों को इटली में कोरोना संक्रमितों में ऐसे प्रमाण मिले हैं। संचारी ​रोगों के विशेषज्ञ मेटियो बाशेट्टी भी इससे सहमति जताते हैं।

पहले जहां कोरोना के संक्रमण के बाद जल्द ही मरीज की मौत हो जाती थी, अब ऐसे मामलों की तादाद बढ़ रही है जिनमें मरीज बड़ी संख्या में स्वस्थ हुए और कोरोना से होने वाली मौतों में गिरावट आने लगी।

इस समय कई देशों में वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। हालांकि, मेटियो बाशेट्टी एक अलग संभावना व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि अगर यह बीमारी गायब हो जाती है तो वैक्सीन की जरूरत ही नहीं होगी! ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही इस पर विस्तार से कहा जा सकता है।

प्रो. मेटियो बाशेट्टी कोरोना वायरस की क्षमता की तुलना दो जानवरों से करते हैं। उनके मुताबिक, मार्च-अप्रैल में यह वायरस जंगल में शेर जैसा था, जो जून के आखिर तक बिल्ली जैसा हो गया है। अब 80 से ज्यादा साल के मरीज भी जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ती। इसका कारण यह है कि अब कोरोना वायरस फेफड़ों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पा रहा है, जबकि पहले ऐसे लोग दो-तीन दिन में ही जान गंवा देते थे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस लगातार खुद को परिवर्तित कर रहा है। यह मनुष्य की कोशिकाओं के संपर्क में आकर जीनोम की प्रतिकृति का निर्माण करता है। प्राय: आरएनए वायरस संपूर्ण जीनोम की प्रतिकृति नहीं बना सकते। इस प्रक्रिया को म्यूटेशन कहा जाता है जिससे वायरस धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। कोरोना का जोर टूटने के पीछे भी इसी सिद्धांत को उत्तरदायी बताया जा रहा है।