एयर इंडिया का विमान। फोटो: फेसबुक पेज।
एयर इंडिया का विमान। फोटो: फेसबुक पेज।

नई दिल्ली/भाषा। उच्चतम न्यायालय ने विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए एयर इंडिया को छह जून तक गैर-नियमित उड़ानों में बीच की सीट पर भी यात्रियों को बैठाने की अनुमति सोमवार को प्रदान कर दी। यह अनुमति देते हुए न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी की और कहा कि सरकार को वाणिज्यिक विमान सेवाओं की सेहत की बजाय नागरिकों की सेहत के लिए अधिक चिंतित होना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि छह जून के बाद एयर इंडिया बंबई उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के अनुरूप ही अपनी गैर-नियमित उड़ानों का परिचालन करेगा। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने ईद के अवसर पर अवकाश होने के बावजूद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्र और एयर इंडिया की अपील पर सुनवाई के दौरान एयर इंडिया को अपनी गैर-नियमित उड़ानों में बीच वाली सीट पर भी यात्री बैठाने की अनुमति दी।

इसके साथ ही पीठ ने सारा मामला वापस बंबई उच्च न्यायालय के पास भेज दिया। पीठ ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि दो जून, 2020 को सुनवाई के लिए निर्धारित दिन सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में एक प्रभावी अंतरिम आदेश पारित किया जाए।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘हमारी सुविचारित राय है कि याचिकाकर्ता एयर इंडिया को छह जून, 2020 तक अपने गैर-नियमित उड़ानों में बीच की सीट की बुकिंग के साथ परिचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, इसके बाद एयर इंडिया उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के अनुसार ही अपनी गैर-नियमित उड़ानों का परिचालन करेगी।’

पीठ ने कहा कि प्राधिकारियों को सामाजिक दूरी बनाए रखने के महत्व को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि महामारी के संक्रमण की वजह से कंधे से कंधा मिलाकर बैठना खतरनाक होगा। पीठ ने कहा कि सामान्यत: वह निचली अदालतों के अंतरिम आदेशों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती है।

केंद्र और एयर इंडिया की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों, जिन्हें यात्रा के लिये टिकट जारी किए जा चुके हैं, में अत्यधिक बेचैनी और परेशानी हो गई है। मेहता ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों के सामने खाने और पैसे का संकट है।

पीठ ने मेहता के कथन का संज्ञान लेते हुए कहा कि वैसे भी कुछ मामलों में एक साथ यात्रा करने के कुछ परिवारों के कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि परिवार के किसी भी सदस्य को बीच की सीट से उतारे जाने पर वह पीछे छूट जाएगा।

पीठ ने इस अपील का निबटारा करते हुए कहा, ‘हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक वाणिज्यिक हित की बजाय इस मामले के लंबित होने के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य और यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी मानदंड को बदलने के लिए स्वतंत्र हैं।

पीठ ने कहा कि एयर इंडिया और दूसरी विमान कंपनियों को विमान के भीतर दो यात्रियों के बीच की सीट रिक्त रखकर सामाजिक दूरी के नियम का पालन करने सहित सुरक्षा उपायों के बारे में उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना होगा।

पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के 22 मई के आदेश के खिलाफ केंद्र और एयर इंडिया की अपील पर सुनवाई करते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘आपको नागरिकों की सेहत के बारे में ज्यादा चिंतित होना चाहिए न कि वाणिज्यिक विमान सेवाओं की सेहत के बारे में।’

इस मामले में सुनवाई के दौरान मेहता ने 23 मार्च के सर्कुलर का हवाला दिया और कहा कि भारत ने कोविड-19 की वजह से अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ाने निलंबित कर रखी थीं और अब 22 मई का सर्कुलर उसके स्थान पर जारी किया गया है।’

इस पर पीठ ने मेहता से कहा, ‘आपको वाणिज्यिक विमान सेवाओं की बजाय नागरिकों की सेहत के बारे में ज्यादा चिंतित होना चाहिए।’ पीठ ने कहा कि जहां तक सामाजिक दूरी का संबंध है तो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों में इस संबंध में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए।

मेहता ने कहा कि 16 जून तक के लिए सभी गैर-नियमित उड़ानों के टिकट बुक हो चुके हैं और विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने का काम जारी है। उच्च न्यायालय ने 22 मई को एयर इंडिया के एक पायलट की याचिका पर एयर इंडिया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से जवाब मांगा था। इस याचिका में दावा किया गया है कि विमान कंपनी विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को भारत लाते समय कोविड-19 से संबंधित उपायों का पालन नहीं कर रही हैं।

उच्च न्यायालय ने एयर इंडिया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए इस मामले को दो जून के लिए सूचीबद्ध कर दिया था। पायलट देवेन कनानी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कोरोना महामारी की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के संबंध में भारत सरकार के 23 मार्च के सर्कुलर में कोविड-19 संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये कुछ शर्ते निर्धारित की गई थीं।

हालांकि, विमान में दो यात्रियों के बीच की सीट खाली रखने वाली शर्त का एयर इंडिया पालन नहीं कर रही है। कनानी ने अपने दावे के समर्थन में सैन फ्रांसिस्को और मुंबई के बीच एयर इंडिया की उड़ान की तस्वीर भी पेश की जिसमें सारी सीटें भरी हुई थीं।

एयर इंडिया ने पायलट की याचिका का विरोध किया था और उच्च न्यायालय को बताया था कि 23 मार्च के सर्कुलर के बाद सरकार ने 22 मई को एक नया सर्कुलर जारी किया है जिसमें 25 मई से घरेलू उड़ानों की अनुमति दी गई है। एयर इंडिया ने कहा कि नए सर्कुलर में यह नहीं कहा गया है कि बीच की सीट खाली रखनी होगी।