नई दिल्ली/दक्षिण भारत। पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा पर बुधवार को संसद में चर्चा हुई। लोकसभा में जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिन्होंने भी दंगा करने की हिमाकत की है, वे कानून की गिरफ्त से इधर-उधर एक इंच भी भाग नहीं पाएंगे।

शाह ने कहा कि दंगों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजन के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जिस प्रकार से देश और दुनिया में इन दंगों को प्रस्तुत किया जा रहा है और आज भी इस सदन में जिस प्रकार से रखने का प्रयास हुआ है, मैं बड़े संयम के साथ इसको स्पष्ट करना चाहूंगा।

शाह ने कहा कि जब दंगों की बात हो और पुलिस मैदान में जूझ रही हो और उसे जांच करके आगे भी इसके तथ्यों को कोर्ट के सामने रखना है तो उस समय हमें वास्तविकता को समझना चाहिए। काफी सदस्यों ने एक सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी? इस सदन के अंदर विपक्ष का यह दायित्व है कि सत्ता पक्ष और उसके अधीन विभागों की कड़ी आलोचना करे और उनकी निगरानी रखे और कहीं गलती होती है तो उसे सदन में भी और बाहर भी उठाए।

शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सिर पर सबसे पहली जिम्मेदारी हिंसा को रोकना थी। 24 फरवरी को 2 बजे के आस-पास पहली सूचना प्राप्त हुई थी और अंतिम सूचना 25 फरवरी को रात 11 बजे प्राप्त हुई। दिल्ली पुलिस ने 36 घंटे में दंगे को समाप्त करने का काम किया है। मैं अगले दिन वहां गया, जब तक कोई घटना नहीं हुई थी। मैं यहां शाम 6.30 को यहां गया और अगले दिन श्रीमान ट्रम्प के जितने भी कार्यक्रम थे, किसी में भी नहीं गया।

शाह ने कहा कि आप मुझ पर सवाल उठा सकते हैं और आपको ये अधिकार है, लेकिन तथ्यों के साथ तोड़-फोड़ करने का किसी का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं ट्रम्प के कार्यक्रम में बैठा था, उनका कार्यक्रम पहले से तय था और मेरे संसदीय क्षेत्र में था। मैंने ही अजित डोभाल से विनती की थी कि आप वहां जाइए और पुलिस का मनोबल बढ़ाइए। मेरी ही विनती पर वो वहां गए थे।

शाह ने बताया, कुछ लोगों ने कहा कि सीआरपीएफ, मिलिट्री भेजनी चाहिए थी। 23 तारीख को 17 कंपनी दिल्ली पुलिस की, 13 कंपनी सीआरपीएफ की कुल 30 कंपनी क्षेत्र में पहले से ही थीं। हमने लोगों से, मीडिया से दंगों का फुटेज मांगा है और मुझे कहते हुए आनंद है कि दिल्ली की जनता ने हजारों की तादात में पुलिस को वीडियो भेजे हैं। मुझे आशा है कि अंकित शर्मा के खून का भेद भी उन्हीं वीडियों में से बाहर आने वाला है।

शाह ने कहा कि 27 फरवरी से आज तक 700 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं। 2,647 लोग हिरासत में लिए गए हैं। सीसीटीवी फुटेज 25 से ज्यादा कम्प्यूटर पर एनालिसिस हो रहा है। हमने पूरे लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा करके संसद के दोनों सदनों ने सीएए को मतदान करके पास किया था। फिर भी इसे लेकर देशभर में लोगों को गुमराह किया गया कि इससे अल्पसंख्यकों की नागरिकता चली जाएगी। मुझे बताइये की इसमें कौनसा क्लाज है जिससे किसी की नागरिकता जाती हो।

शाह ने कहा कि ओवैसी साहब, ये सॉफ्टवेयर है, ये न तो धर्म और न ही कपड़े देखता है। वो सिर्फ और सिर्फ चेहरा और कृत्य देखता है और उससे ही उसको पकड़ता है। फेस आइडेंटिटी सॉफ्टवेयर द्वारा लोगों को पहचानने की प्रक्रिया चालू है। ओवैसी साहब ने संभावना जताई कि एक ही कम्यूनिटी के लिए ये हो रहा है।

शाह ने कहा कि फेस आइडेंटिटी सॉफ्टवेयर के माध्यम से हमने 1,100 से ज्यादा लोगों का फेस आइडेंटिफाई किया है, उनकी पहचान कर ली गई है। इनको गिरफ्तार करने के लिए 40 टीमें बनाई गई हैं, जो दिन-रात लगी हुई हैं।

शाह ने कहा कि 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में एक पार्टी ने एंटी सीएए रैली की, उसमें पार्टी की अध्यक्ष महोदया भाषण में कहती हैं कि घर से बाहर निकलो, आर-पार की लड़ाई करों, अस्तित्व का सवाल है। उसके बाद उनके एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी नहीं निकलोगे तो कायर कहलाओगे। ये हेट स्पीच नहीं है क्या?

शाह ने कहा कि मैं सदन के माध्यम से दिल्ली और देश की जनता को कहना चाहता हूं कि जिन्होंने भी दंगा करने की हिमाकत की है, वो कानून की गिरफ्त से इधर-उधर एक इंच भी भाग नहीं पाएंगे।