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आध्यात्मिक चेतना के जागरण का प्रयोग है सामायिक: साध्वी रुचिकाश्री
सुखी वही है जो संतुलित है, दुखी वही है जो असंतुलित है
 
एक व्यक्ति प्रतिदिन लाख स्वर्ण मुद्राओं का दान करता है और दूसरा आदमी मात्र दो घड़ी की सामायिक करता है तो वह स्वर्ण मुद्राओं का दान करने वाला व्यक्ति सामायिक करने वाले की समानता नहीं कर सकता। 

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शहर के गणेश बाग संघ के तत्वावधान में एवं साध्वी डॉ. रुचिकाश्रीजी, पुनितज्योतिजी, जिनाज्ञाश्रीजी के सान्निध्य में उपाध्यायश्री पुष्करमुनिजी महाराज के 112वीं जयंती के उपलक्ष्य में पंच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान बुधवार को सामायिक व एकासन दिवस मनाया गया। 

साध्वी रुचिकाश्री जी ने अपने प्रवचन में कहा कि सामायिक आध्यात्मिक चेतना के जागरण का प्रयोग है। सामायिक समभावों का प्रवाह है। भौतिकता से प्रभावित इस संसार में हर व्यक्ति वास्तविक सुख की खोज में भटक रहा है। इस भटकन को दूर करने का और वास्तविक सुख के साक्षात्कार के लिए सामायिक एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। 

सुख-दुख का प्रश्न व्यक्ति के संतुलन-असंतुलन से जुड़ा है। सुखी वही है जो संतुलित है। दुखी वही है जो असंतुलित है। दुख में सुख को पा लेने की प्रक्रिया है सामायिक सामायिक की आराधना का अर्थ है जीवन में संतुलन। यह आत्मा में लीन होने की साधना है। 

साध्वीजी ने कहा कि आचार्य कहते हैं कि एक व्यक्ति प्रतिदिन लाख स्वर्ण मुद्राओं का दान करता है और दूसरा आदमी मात्र दो घड़ी की सामायिक करता है तो वह स्वर्ण मुद्राओं का दान करने वाला व्यक्ति सामायिक करने वाले की समानता नहीं कर सकता। 

भगवान महावीर ने कहा है, पहली आवश्यकता है, समता की साधना। इसकी साधना किए बिना कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकता, आत्मा की ओर प्रस्थान नहीं कर सकता। हम इसका मूल्य आंके। साध्वीश्री ने प्रेरणा दी कि सामायिक ही मोक्ष का उत्कृष्ट साधन है इसलिए आलस्य त्यागकर नित्य अवश्य सामायिक का अभ्यास करना चाहिए्‌। 

संघ के सुनील सांखला ने पांच दिवसीय कार्यक्रमों की जानकारी दी। प्रथम दिवस सामायिक एवं एकासन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने 2-2 सामायिक एवं एकासन तप किये। इस अवसर पर गणेश बाग श्री संघ के पदाधिकारी, ट्रस्टी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस अवसर पर शांतिलाल डूंगरवाल ने भी अपने विचार रखे। धर्म सभा का संचालन एवं स्वागत राजू सकलेचा ने किया। साध्वी श्री रुचिकाश्री जी ने मंगलपाठ प्रदान किया।

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