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कर्नाटकः उच्च न्यायालय ने बेंगलूरु शहर की सीमा के भीतर पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध बरकरार रखा
संभवतः पहली बार फैसले के पन्नों में पटाखों से घायल हुए लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है
 
इनमें उन युवाओं और बच्चों की तस्वीरें हैं जिनकी पटाखों की चोटों के कारण आंखों की रोशनी चली गई थी

बेंगलूरु/भाषा। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलूरु शहर की सीमा के भीतर पटाखों की बिक्री के लिए जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र को वापस लेने के पुलिस विभाग के फैसले को बरकरार रखा है।

संभवतः पहली बार फैसले के पन्नों में पटाखों से घायल हुए लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। इनमें उन युवाओं और बच्चों की तस्वीरें हैं जिनकी पटाखों की चोटों के कारण आंखों की रोशनी चली गई थी।

उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा, ‘इससे संविधान के निर्माताओं की रुह अपनी कब्र में कांप जाएगी। जीवन, अंग-भंग और स्वतंत्रता के अधिकार का इससे बड़ा उल्लंघन नहीं हो सकता है।’

कृष्णा एस. दीक्षित की एकल पीठ ने कई व्यापारियों की दलील को खारिज कर दिया जिन्होंने पुलिस विभाग के फैसले को चुनौती दी थी।

पुलिस आयुक्त, बेंगलुरु ने 2012 में इन व्यापारियों से एनओसी वापस ले ली थी। कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक ने 2013 में आयुक्त के आदेश को बरकरार रखा था। व्यापारियों ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसने 29 जुलाई, 2022 को अपना फैसला सुनाया था।

अदालत ने कहा कि पटाखों की बिक्री जहर, शराब, तंबाकू और विस्फोटक जैसे सामान की श्रेणी में आती है और इसलिए इसके व्यापार को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार के तहत शामिल नहीं किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘यह कहने की जरूरत नहीं है कि विस्फोटक पदार्थ शराब, जहर आदि जैसे पदार्थ ‘अतिरिक्त वाणिज्यिक’ होते हैं, कोई भी नागरिक संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत असीमित मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता है।’

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