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दुनियाभर में 50 साल से कम उम्र के लोगों में क्यों बढ़ रहा कैंसर का खतरा?
शोधकर्ता यह जानने में सफल हो सकते हैं कि आहार और जीवन शैली की आदतें शुरुआती जीवन में ही बनती हैं
 
इनमें से कुछ शुरुआती कैंसर का पता बेहतर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और जल्दी निदान के माध्यम से लगाया जाता है

डबलिन/द कन्वरसेशन। हम जानते हैं कि कैंसर होने के अपने जोखिम को कम करने के लिए हमें क्या करना चाहिए, है ना? एसपीएफ़ का उपयोग, धूम्रपान न करें, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें, फिट रहें, वजन कम करें और पर्याप्त नींद लें। लेकिन तब क्या होगा यदि कैंसर होने के अधिकांश कारण हमारे जीवन के प्रारंभिक वर्षों में ही हमें प्रभावित कर चुके हों, या इससे भी बदतर, हमारे जन्म से पहले ही हमारे शरीर में पनप चुके हों।

ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि ऐसा हो सकता है, खासकर कैंसर के उन मामलों में जो 50 साल की उम्र से पहले होते हैं (शुरुआती कैंसर)।

नेचर रिव्यू क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण खोज यह है कि 1990 के बाद पैदा हुए लोगों में, उदाहरण के लिए, 1970 में पैदा हुए लोगों की तुलना में 50 वर्ष की आयु से पहले कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है। इसका मतलब है कि पिछली पीढ़ियों के मुकाबले युवा लोगों में इसके जोखिम अधिक होंगे।

जीवन के शुरूआती वर्षों में हम जिन चीजों के संपर्क में आते हैं, वे जीवन में बाद में कैंसर के विकास के हमारे जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं, और कैंसर के रुझानों की इस समीक्षा से यह भी पता चलता है कि ये कारक शुरुआती कैंसर को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

प्रारंभिक जीवन में इन कारकों के संपर्क में आना क्या मायने रखता है, यह अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन सबसे अहम कारकों में आहार, जीवन शैली, पर्यावरण और हमारे पेट (माइक्रोबायोम) में रहने वाले कीड़े शामिल हैं।

बड़ी संख्या में लोगों का अध्ययन करने पर, शोधकर्ता यह जानने में सफल हो सकते हैं कि आहार और जीवन शैली की आदतें शुरुआती जीवन में ही बनती हैं। यह मोटापे में देखा जाता है जहां मोटे बच्चों के मोटे वयस्क बनने की संभावना अधिक होती है। चूंकि मोटापा कैंसर के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है, इसलिए यह इस प्रकार है कि बचपन से मोटापे के शिकार लोगों में कम उम्र में कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है, संभवतः इसलिए कि वे लंबे समय तक जोखिम कारक के संपर्क में रहे हैं।

बेशक, इनमें से कुछ शुरुआती कैंसर का पता बेहतर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और जल्दी निदान के माध्यम से लगाया जाता है, जिससे दुनिया भर में सालाना निदान किए जाने वाले नए कैंसर की संख्या में वृद्धि होती है। लेकिन ये पूरी कहानी नहीं है।

देर से शुरू होने वाले कैंसर की तुलना में शुरुआत के कैंसर के अलग-अलग आनुवंशिक संकेत होते हैं और इसकी वजह से बाद के जीवन में निदान किए गए कैंसर की तुलना में इसके फैलने की संभावना भी अधिक होती है। इसका मतलब यह है कि उन कैंसर को विभिन्न प्रकार के उपचार और अधिक व्यक्तिगत दृष्टिकोण की आवश्यकता हो सकती है जो कैंसर के विकसित होने के समय रोगी की उम्र से जुड़े हों।

आंत बैक्टीरिया

ब्रिघम अध्ययन ने 14 तरह के कैंसर पर अध्ययन किया और पाया कि कैंसर की आनुवंशिक संरचना और कैंसर की आक्रामकता और वृद्धि उन रोगियों में भिन्न थी, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु के बाद कैंसर विकसित करने वालों की तुलना में 50 वर्ष की आयु से पहले इसे विकसित किया था।

यह कई प्रकार के आंत कैंसर (कोलोरेक्टल, अग्नाशय, पेट) में अधिक प्रमुख प्रतीत होता है। इसका एक संभावित कारण हमारे आहार और माइक्रोबायोम से संबंधित है।

अधिक मीठे आहार, एंटीबायोटिक्स और स्तनपान से आंत बैक्टीरिया बदल जाते हैं। और जैसे समय के साथ समाज में इन चीजों के पैटर्न बदलते हैं, वैसे ही हमारे पेट में बैक्टीरिया भी होते हैं। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित चीनी करों के कार्यान्वयन को सही ठहरा सकता है।

अगर हमारी स्वस्थ कोशिकाएं गर्भ में ही विकसित होती हैं, तो हो सकता है कि वे कोशिकाएं जो कैंसर का कारण बनती हैं वह भी उसी समय विकसित हो जाती हों। मातृ आहार, मोटापा और वायु प्रदूषण और कीटनाशक जैसे पर्यावरणीय जोखिमों को पुरानी बीमारियां और कैंसर के जोखिम को बढ़ाने के लिए जाना जाता है।

इसके विपरीत, गर्भावस्था के दौरान कम भोजन मिलने से, जैसा कि अकाल में देखा गया है, संतानों में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इन दोनों निष्कर्षों के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए सामाजिक दृष्टिकोण के लिए अलग-अलग प्रभाव होंगे।

एक हेमेटोलॉजिस्ट के रूप में, मैं मल्टीपल मायलोमा के रोगियों की देखभाल करता हूं, जो एक लाइलाज रक्त कैंसर है जो आमतौर पर 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को प्रभावित करता है। हाल के वर्षों में, दुनिया भर में इस कैंसर से पीड़ित युवा लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह अध्ययन मोटापे को शुरुआती बीमारी के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में चिह्नित करता है, लेकिन स्पष्ट रूप से, अन्य जोखिम कारक अभी तक उजागर नहीं हुए हैं।

यह समझना कि जीवन की शुरूआत में होने वाले कैंसर की वजह क्या हैं, कौन से जोखिम वास्तव में मायने रखते हैं और उन्हें रोकने के लिए क्या किया जा सकता है, भविष्य की पीढ़ियों के लिए रोकथाम रणनीतियों को विकसित करने के कुछ पहले कदम हैं।

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