सांकेतिक चित्र
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लंदन/भाषा। भारतीय मूल के एक उद्यमी की ब्रिटेन स्थित जैव विज्ञान कंपनी इटली के अस्पतालों में कोविड-19 के तेजी से बिगड़ते लक्षणों वाले मरीजों के उपचार की संभावना तलाशने के लिए विशेष प्रकार की गठिया रियुमेट्वाइड आर्थराइटिस की दवा के परीक्षण कर रही है।

इजना बायोसाइंस ने कहा कि इसकी रोग प्रतिकारक (एंटीबॉडी) थेरैपी ‘नैमिलुमैब’ को ह्यूमैनिटस अनुसंधान समूह के साथ आगामी सप्ताहों में बेरगामो और मिलान स्थित ह्यूमैनिटस के अस्पतालों में कोविड-19 के रोगियों पर परखा जाएगा।

कंपनी के कार्यकारी प्रमुख सुमित सिद्धू ने कहा, ‘हम अपने एंटी जीएम सीएसएफ एमएबी नैमिलुमैब से कोविड-19 से गंभीर रूप से पीड़ित लोगों के संभावित इलाज को लेकर काफी खुश हैं।’

उन्होंने कहा, ‘रोग प्रतिरोधी क्षमता से जुड़ी बीमारियों में जीएम-सीएसएफ की भूमिका को ले कर मजबूत साक्ष्य और कोविड-19 के बारे में बढ़ती हमारी समझ है। साक्ष्य से पता चलता है कि एंटी जीएम-सीएसएफ थेरैपी में वायरस के खिलाफ कार्रवाई के लिए रोगियों की रोग प्रतिरोधी प्रणाली के तरीके में बदलाव लाने की क्षमता है, जिससे ठीक होने में मदद मिलती है।’

ह्यूमैनिटस रिसर्च हॉस्पिटल के गठिया विज्ञान एवं चिकित्सीय रोग प्रतिरोधक विज्ञान इकाई के प्रमुख तथा ह्यूमैनिटस यूनिवर्सिटी के इंटरनल मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर कार्लो सेल्मी के नेतृत्व में यह समूची कवायद हो रही है।

इस कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के ऐसे रोगियों का ब्योरा एकत्र किया जाएगा जिनकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। इसका समूचा उद्देश्य रोगियों के आईसीयू या वेंटिलेटर पर जाने से पहले ही उनका उपचार करने का है।

सेल्मी ने कहा, ‘चिकित्साविद कोविड-19 के गंभीर रोगियों के लिए नए उपचार विकल्पों पर अग्रिम मोर्चे पर रहकर काम कर रहे हैं।’