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कोरोना की कौनसी वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार? यह कहते हैं विशेषज्ञ
 
कोरोना की कौनसी वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार? यह कहते हैं विशेषज्ञ
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

मेलबर्न/द कन्वरसेशन। कोविड-19 से बचने के लिए कई तरह की वैक्सीन के सामने आने के बाद लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि कौन सा टीका सबसे अच्छा है? हमने इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास तो किया, लेकिन हकीकत यह है कि यह बताना आसान नहीं है कि कौन सा टीका ‘सर्वश्रेष्ठ’ है। सर्वश्रेष्ठ से हमारी मुराद क्या है क्या एक ऐसा टीका जो आपको गंभीर बीमारी से बचाने में बेहतर हो? जो आपके आस-पास मौजूद किसी भी प्रकार के वायरस से आपकी रक्षा करता है? जिसे कम बूस्टर शॉट्स की जरूरत है? जो आपके आयु वर्ग के लिए सही है?

यहां अगर हम परिभाषित कर भी दें कि ‘सर्वश्रेष्ठ’ क्या है, तो यह जरूरी तो नहीं कि आपको वैक्सीन का वह विकल्प मिल ही जाएगा और लोगों को उनकी पसंद का टीका मिले इसका इंतजार किए बिना बीमारी से सुरक्षा के लिए दुनिया के अधिकांश लोगों को जो टीका उपलब्ध होगा वही लगाया जाएगा। तो ऐसे में यही कहा जा सकता है कि वही कोविड वैक्सीन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है जो अभी आपके पास उपलब्ध है। अगर आप अभी भी आश्वस्त नहीं हैं तो हम आपको बताते हैं कि कोविड-19 के टीकों की तुलना करना कठिन क्यों है।

आप सोच सकते हैं कि क्लिनिकल ट्रायल्स इस सवाल का कुछ जवाब दे सकते हैं कि कौन सा टीका ‘सर्वश्रेष्ठ’ है, विशेष रूप से तीसरे चरण के ट्रायल्स, जिनके आधार पर दुनिया भर के नियामक अधिकारियों द्वारा इस टीके का अनुमोदन किया गया। हम जानते हैं कि विभिन्न कोविड टीकों की प्रभावकारिता अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, क्लिनिकल ट्रायल में फाइजर वैक्सीन ने लक्षणों को रोकने में 95 प्रतिशत की प्रभावकारिता दिखाई, जबकि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन डोज के आधार पर 62-90 प्रतिशत कारगर पाई गई।

लेकिन तीसरे चरण के परीक्षणों की सीधी तुलना जटिल है क्योंकि वे विभिन्न स्थानों और समय पर होते हैं। इसका मतलब है कि समुदाय में संक्रमण की दर, सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और अलग-अलग वायरल रूपों का मिश्रण भिन्न हो सकता है। परीक्षण प्रतिभागी उम्र, जातीयता और संभावित अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों में भी भिन्न हो सकते हैं। एक तरह से हम सीधे टीके की प्रभावकारिता की तुलना कर सकते हैं, वह है वैक्सीन लेने वाले लोगों में से एक एक का अध्ययन करके। ये एक ही परीक्षण में एक टीका प्राप्त करने वाले लोगों के परिणामों की तुलना दूसरे प्राप्त करने वालों के साथ करते हैं।

इन परीक्षणों में, हम प्रभावकारिता को कैसे मापते हैं, अध्ययन की आबादी और हर दूसरे कारक समान हैं। इसलिए हम जानते हैं कि परिणामों में कोई अंतर टीकों के बीच अंतर के कारण होना चाहिए। कोविड टीकों की प्रभावशीलता की तुलना उन देशों में की जा सकती है जिन्होंने एक ही आबादी के लिए अलग-अलग टीके लगाए हैं। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि फाइजर और एस्ट्राजेनेका दोनों टीकों की प्रभावशीलता समान है। वे दोनों एक खुराक के बाद भी कोविड-19 के लक्षणों, अस्पताल में भर्ती होने की आशंका और मृत्यु को मज़बूती से रोकते हैं।

ऐसे में यह जरूरी नहीं कि पहली नज़र में क्लिनिकल ट्रायल में बेहतर परिणाम दिखाने वाली वैक्सीन दरअसल ‘सर्वश्रेष्ठ’ ही हो और आप यह भी जानते हैं कि आज आपको जो कोविड वैक्सीन मिल रही है, वह शायद आखरी भी नहीं है। चूंकि टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है, इसलिए प्रभावी सुरक्षा बनाए रखने के लिए समय-समय पर बूस्टर आवश्यक हो जाएंगे। दरअसल ऐसे में कई सारी वैक्सीन मिलकर ‘श्रेष्ठ’ बन सकेंगी।

‘सर्वश्रेष्ठ’ वैक्सीन लगवाने की आपकी जिद पूरी तरह से तर्कसंगत है। लेकिन सबसे अच्छा टीका वह है जो अभी आपके लिए उपलब्ध है क्योंकि यह आपको कोविड-19 के संक्रमण से तत्काल बचाता है, हमारे समुदाय के कमजोर सदस्यों में संचरण को कम करता है और गंभीर बीमारी के आपके जोखिम को काफी हद तक कम करता है। सभी उपलब्ध टीके यह काम करते हैं और इसे अच्छी तरह से करते हैं। सामूहिक दृष्टिकोण से, ये लाभ मिश्रित हैं। जितने अधिक लोगों को टीका लगाया जाता है, उतना ही समुदाय प्रतिरक्षित होता है (जिसे सामूहिक प्रतिरक्षा के रूप में भी जाना जाता है), जो कोविड-19 के प्रसार को कम करता है।

वैश्विक महामारी के इस समय में जब हर दिन वायरस रूप बदलकर अधिक खतरनाक हो रहा है, वैक्सीन की वैश्विक आपूर्ति अनिश्चित है और कई क्षेत्रों में महामारी का प्रकोप बढ़ने की आशंका है, ‘सर्वश्रेष्ठ’ वैक्सीन की प्रतीक्षा करना एक पूरी न हो सकने वाली इच्छा है। दरअसल वैक्सीन की हर खुराक दुनिया के हालात को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया जाने वाला एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।