ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वैश्विक स्थिरता, साझा सुरक्षा और अभिनव विकास पर ब्रिक्स के वर्चुअल शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक महामारी के दौरान भी अपनी गति पर काम करना जारी रखने में सक्षम रहा है।

मोदी ने कहा कि आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादियों को समर्थन और सहायता देने वाले देशों को भी दोषी ठहराया जाए और इस समस्या का संगठित तरीके से मुकाबला किया जाए।

मोदी ने कहा कि इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विषय वैश्विक स्थिरता, साझा सुरक्षा और नवीन विकास है जो न केवल समकालीन है, बल्कि भविष्य के लिए भी है। दुनिया प्रमुख भूस्थिर परिवर्तन देख रही है, जिसके प्रभाव स्थिरता, सुरक्षा और विकास पर जारी रहेंगे।

मोदी ने कहा कि इस वर्ष दूसरे विश्वयुद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर हम वीरगति पाए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। भारत से भी 2.5 मिलियन से अधिक वीर इस युद्ध में यूरोप, अफ्रीका, और साउथ ईस्ट एशिया जैसे कई फ्रंट्स पर सक्रिय थे।

मोदी ने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ है। भारत बहुपक्षता का प्रमुख सम​र्थक रहा है, और इसकी परंपरा में पूरी दुनिया को एक परिवार माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सर्वोपरि रही है।

मोदी ने कहा कि भारत को लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार बहुत महत्वपूर्ण है। हम इस मुद्दे पर अपने ब्रिक्स भागीदारों से समर्थन की उम्मीद करते हैं। कई अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन समकालीन वास्तविकताओं के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। डब्ल्यूटीओ, आईएमएफ, डब्ल्यूएचओ जैसे संस्थानों में सुधार की आवश्यकता है।

मोदी ने कहा कि हमें खुशी है कि रूस के नेतृत्व में ब्रिक्स की आतंकवाद-रोधी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। भारत इसे अपने नेतृत्व के दौरान आगे ले जाएगा। मोदी ने कहा कि कोरोना के दौरान भारतीय फार्मा उद्योग की क्षमता के कारण हम 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाइयां भेज पाए। हमारी वैक्सीन उत्पादन और डिलीवरी क्षमता भी इस तरह मानवता के हित में काम आएगी।

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के अपने नेतृत्व के दौरान, भारत ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देगा।