रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

हैदराबाद/दक्षिण भारत। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि यह नया भारत है जो किसी भी तरह के उल्लंघन, आक्रमण या सीमाओं पर किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का माकूल और मुक्कमल जवाब देने की क्षमता रखता है।

चीन के साथ सीमा विवाद से भारत जिस तरह से निपटा है उसने साबित किया है कि भारत कमजोर नहीं है और सीमा पर उल्लंघन, आक्रामकता तथा किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि 1961 के ‘गोवा मुक्ति संग्राम’ से लेकर 65 के ‘इंडो-पाक युद्ध’, 1971 के ‘बांग्लादेश मुक्ति संग्राम’, 1984 के ‘ऑपरेशन मेघदूत’, 1999 में ऑपरेशन ‘सफ़ेद सागर’ और हाल ही में ‘बालाकोट’ के कुछ ऐसे अध्याय हैं, जो न केवल वायुसेना के, बल्कि हमारे देश के इतिहास के ‘स्वर्णिम अध्याय हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे एयर वॉरियर्स ने जिस तरह अपना सर्वस्व दांव पर लगाकर, देश की आन, बान, शान पर कोई आंच नहीं आने दी, वह अपने आप में एक मिसाल है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि नॉर्दन सेक्टर में हाल में हुए भारत-चीन गतिरोध से आप सभी परिचित हैं। कोविड जैसे संकट के समय में चीन का यह रवैया उस देश की नीयत को दिखाता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने यह दिखा दिया है कि अब यह हमारा भारत कोई कमजोर भारत नहीं है। यह नया भारत है जो किसी भी तरह के उल्लंघन, आक्रमण या सीमाओं पर किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का माकूल और मुक्कमल जवाब देने की क्षमता रखता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा और समर्थन कई बड़े देशों द्वारा भी हुई है, आप सब भी इससे अवगत होंगे। हम किसी भी विवाद का समाधान, शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिए ही निकालने में यकीन रखते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनो देशों के बीच सैन्य और डिप्लोमैटिक चैनल्स के ज़रिए बातचीत हो रही है। मैं फिर से कहना चाहूंगा कि हम संघर्ष नहीं बल्कि शांति चाहते हैं। मगर देश के स्वाभिमान पर किसी भी तरह की चोट हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम किसी भी स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इसी तरह वेस्टर्न सेक्टर में, पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर आए दिन हमारा पड़ोसी कुछ न कुछ नापाक हरकतें करते रहता है। एक नहीं बल्कि चार युद्धों में मात खाने के बाद भी पाकिस्तान आतंकवाद के ज़रिए एक प्रॉक्सी वार लड़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अब तो भारत आतंकवादियों के ख़िलाफ़ देश के भीतर ही नहीं बल्कि सीमा पार जाकर भी प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ प्रभावी कारवाई करके सारी दुनिया को भारतीय सेना की ताक़त और आतंक के ख़िलाफ़ उसके मज़बूत इरादों से परिचित करा दिया है।

मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में डिफेंस केवल जल-थल-वायु की रक्षा तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह एक ऐसा डाइनेमिक चैलेंज होगा जिसके लिए हमें आने वाले दिनों में खुद को तैयार करना होगा।

इसलिए आप सभी टेक्नोलॉजी और सैन्य रणनीतियों के अपने ज्ञान को को अपडेट करते रहें। मेरा सुझाव है कि आप इतिहास से सीखें, वर्तमान को जानें और भविष्य की तैयारी करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय वायुसेना आज देश में फोर्स मल्टीप्लायर के साथ-साथ सप्लाई लाइंस की मज़बूती के लिए काम कर रही हैं। आज लद्दाख में मौजूद हमारी सेनाएं, जरूरी हथियारों, इक्विपमेंट, कपड़े और राशन से लैस हैं, तो उसमें वायुसेना का पूरा योगदान है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एक तरफ जहां हमने स्वदेशी ‘लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ तेजस को इंडक्ट और ऑपरेशनलाइज किया है, वहीं दूसरी और फिफ्थ जनरेशन मल्टीरोल फाइटर प्लेन, राफेल को भी शामिल किया है। इससे वायुसेना की क्षमता तो बढ़ी हैं, साथ ही एक नया आत्मविश्वास भी आया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आप लोगों को बताते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि एयर डिफेंस और समुद्री कमान के बारे में सोच-विचार उच्च चरण पर चल रहा है जो आने वाले समय में हमारी सेनाओं को एकीकृत और व्यापक तरीक़े से काम करने में सहूलियत देगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस साल 1971 के युद्ध में हुई विजय की स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। यह साल है उन सभी योद्धाओं को याद करने का, जिन्होंने भारत के लिए पराक्रम और शौर्य की दास्तान लिखी और कई बहादुरों ने अपनी जान तक क़ुर्बान कर दी।

साल 1971 में फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों जैसे सूरमाओं की कहानी और क़ुर्बानी भला कौन भूल सकता है? 1971 की विजय की गौरव गाथा को हम इस साल जन-जन तक पहुचाने जा रहे हैं।

मैं एक बार फिर आप सभी के सुनहरे भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मुझे पूरा विश्वास है, कि आप अपनी उपलब्धियों से अपने ट्रेनर्स, माता-पिता और सारे देश को गौरवान्वित करेंगे। एक सुनहरा भविष्य आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।