कोरोना के नुस्खे

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कोरोना से लड़ाई में भारत के लोग अपने तरीके आजमा रहे हैं। कहीं हल्दी वाला दूध है तो कहीं तुलसी वाला पानी और कहीं गौमूत्र्। वैज्ञानिक आधार न होने के बावजूद इनका एक बड़ा बाजार बन गया है। कोई घरेलू नुस्खों से बना इम्युनिटी पाउडर घोल कर हर सुबह सपरिवार पी रहा है और मानता है कि पारंपरिक नुस्खे उसे महामारी से बचा लेंगे। इस बीच अपने देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या 80 लाख को पार कर गई और इस मामले में उससे आगे सिर्फ अमेरिका है। कोरोना की चपेट में आकर मरने वालों की तादाद भी एक लाख 20 हजार से ज्यादा है। बड़ी संख्या में लोग प्राचीन आयुर्वेदिक दवाओं का रुख कर रहे हैं। कई कंपनियां लोगों की वैकल्पिक तरीकों की मांग पूरी करने में जुटी हुई हैं। हल्दी वाला दूध और तुलसी की बूंदों जैसे घरेलू नुस्खे आकर्षक पैकेटों में बिक्री के लिए स्टोर की शेल्फ तक पहुंच रहे हैं। टीवी पर भी हर्बल डिं्रक के विज्ञापन चल रहे हैं, जिसे आयुर्वेद और योग के दिग्गज बाबा रामदेव की कंपनी बेच रही है। महामारी ने भारत की पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में लोगों की व्याकुलता बढ़ा दी है। सो, आर्थिक रूप से कमजोर लोग आयुर्वेद में राहत ढूंढ रहे हैं। वहीं, आयुर्वेदिक दवाएं कोरोना को रोकने में कितनी कारगर हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण फिलहाल नहीं है। वहीं, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के मुताबिक, इस समय यह उद्योग 10 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है।
आयुर्वेद उपचार बताने वाली भास्वती भट्टाचार्य का कहना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन और दूसरे पारंपरिक इलाजों की कमी ने लोगों को प्राकृतिक उपचारों की तरफ जाने पर मजबूर किया है। आयुर्वेद 5,000 साल पहले लिखा गया और उसके कम से कम दो गुना समय पहले से हमारे आस पास मौजूद है। इसने प्लेग से लेकर चेचक और दूसरी कई महामारियां देखी हैं। इसलिए लोग कह रहे हैं कि चलो देखते हैं, शायद यह काम कर जाए। आयुर्वेद यानी जीवन का विज्ञान और दूसरे इलाजों को सरकार भी खूब बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार में इसके लिए बकायदा अलग से आयुष मंत्रालय का गठन किया गया। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी को शामिल किया गया है। जनवरी में आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक इलाजों को कोरोना वायरस से लड़ने का उपाय बताया। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने बिना लक्षण वाले कोविड के हल्के संक्रमण से पीड़ितों का इलाज आयुर्वेद और योग से करने के दिशा-निर्देश जारी किए।
वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उनसे कहा कि वह कोरोना वायरस के इलाज में आयुर्वेद और योग के असरदार होने का सबूत दें। इसके बावजूद केमिस्ट की दुकानों में अब आयुर्वेद की दवाएं अंग्रेजी दवाओं के साथ ही प्रमुखता से रखी जा रही हैं। दिल्ली में दूध बेचने वाली मदर डेयरी का कहना है कि उसके नए प्रॉडक्ट हल्दी वाला दूध को भरपूर खरीदार मिले हैं। इसकी मांग बहुत, बहुत ज्यादा है तो इसका उत्पादन और वितरण बढ़ाया भी जा रहा है। हर्बल दवाइयां और क्रीम बनाने वाली प्रमुख कंपनी हिमालया ड्रग कंपनी का भी मानना है कि महामारी से पहले की तुलना में अब इन चीजों की मांग 10 गुना बढ़ गई है। वैकल्पिक इलाज की भूख ने विवादित और छद्मविज्ञानी दावों का भी अंबार लगा दिया है, जो कोविड-19 का इलाज करने की बात कह रहे हैं।