जरूरत के अनुसार आसानी से और कम कीमत पर रेत की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी सरकार: निरानी

प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। स्रोत: PixaBay

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। खान एवं भूविज्ञान मंत्री मुरुगेश निरानी ने रेत की निर्बाध आपूर्ति आपूर्ति सुनिश्चित करने और मांग-आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए बुधवार को कई उपायों की घोषणा की। उन्होंने विधानसभा में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि सरकार जरूरत के अनुसार आसानी से और कम कीमत पर रेत की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। परेशानी दूर करने के लिए खान और भूविज्ञान विभाग कई संरचनात्मक सुधार कर रहा है।

निरानी ने कहा कि ग्राम पंचायत सीमा में रेत परिवहन के लिए एकसमान मूल्य बनाए रखा जाना चाहिए। नए रेत प्रावधान ग्राम पंचायत स्तर पर आश्रय और अन्य आवास योजनाओं को लाभान्वित करने के लिए हैं। गड्ढों और तालाबों से रेत निकालने के लिए 300 रुपए प्रति टन निर्धारित हैं। राज्य में 183 सैंड ब्लॉक की पहचान की गई है। रेत को बैलगाड़ी और दोपहिया वाहनों में ढोया जाना चाहिए।

निरानी ने कहा कि रॉयल्टी को टिप्पर, लॉरी और रेत परिवहन करने वाले अन्य वाहनों पर लगाया जाएगा। केवल अधिकार क्षेत्र में रेत का परिवहन किया जाना चाहिए। एक जिले से दूसरे जिले में रेत के परिवहन की अनुमति नहीं होगी। यदि अधिकारी अवैध गतिविधियां होती देखेंगे तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निरानी ने कहा कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट राज्य में विद्यमान हैं। ट्रस्ट द्वारा ये कार्य संभाले जाएंगे: पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला और बाल कल्याण से संबंधित कार्यक्रम, वृद्ध और विभिन्न लोगों का कल्याण, कौशल विकास, स्वच्छता, भौतिक अवसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और जल संरक्षण, खनन जिलों में वायु की गुणवत्ता में सुधार।

निरानी ने कहा कि खान विभाग के अनुदान के साथ विभिन्न विभागों द्वारा उपर्युक्त विकासात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर खान विभाग केआईएडीबी की तर्ज पर कर्नाटक खनिज औद्योगिक विकास बोर्ड की स्थापना करने की योजना बना रहा है।

मंत्री ने कहा कि विभाग में पहली बार सिंगल विंडो एजेंसी स्थापित की गई है। यह खनन प्रस्तावों के लिए उद्योगपतियों के आवेदनों के निपटान में तेजी लाने में मदद करेगी। उपायुक्त जिला स्तर पर समिति का प्रमुख होगा। यह आसानी से लाइसेंस प्राप्त करने और लालफीताशाही से छुटकारा पाने में मदद करेगी। सिंगल विंडो एजेंसी वन, पर्यावरण, राजस्व और गृह विभागों के बीच समन्वय के साथ प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी सुनिश्चित करेगी।

निरानी ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2020-21 के दौरान 3,750 करोड़ रुपए राजस्व एकत्र करना है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व संग्रह को दोगुना करना है। खान और भूविज्ञान विभाग द्वारा तालुक स्तर पर एक उपखंड बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जो जियोलॉजिस्ट बेंगलूरु में काम कर रहे हैं, उन्हें जिला और तालुक स्तर पर काम करना चाहिए। इससे अप्रिय घटनाओं से बचने और विभाग को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि झारखंड के धनबाद में स्थापित राष्ट्रीय खान विश्वविद्यालय की तर्ज पर राज्य में खानों का विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। राज्य के चार राजस्व प्रभागों और तटीय क्षेत्र में पहली बार खनन अदालत शुरू हुई। इससे खनन प्रस्तावों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी।