मेंगलूरु हवाईअड्डा निजीकरण मामले में उच्च न्यायालय का केंद्र को नोटिस

प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोत: PixaBay

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिका में मेंगलूरु अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निजीकरण पर सवाल उठाया गया था और 2019 में कैबिनेट के फैसले को रद्द करने की मांग की गई, जिसमें मेंगलूरु सहित तीन हवाईअड्डों के लिए अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने बोली लगाई गई थी।

बता दें कि केंद्र को यह नोटिस एयरपोर्ट्स अथॉरिटी एम्प्लाइज यूनियन की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओका और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने जारी किया है।

गौरतलब है कि 8 नवंबर, 2018 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मेंगलूरु जैसे छह हवाईअड्डों को आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। वहीं याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह कैबिनेट के फैसले के आधार पर निजीकरण के लिए बोली प्रक्रिया को अवैध, मनमाना और हवाईअड्डा प्राधिकरण अधिनियम के दायरे से परे घोषित करे।

याचिकाकर्ताओं ने 3 जुलाई, 2019 को कैबिनेट के फैसले को रद्द करने की भी मांग की, जिसमें मेंगलूरु सहित तीन हवाईअड्डों के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को मंजूरी दे दी गई थी। फैसले में कहा गया था कि केंद्र के पास इस तरह के समझौते में प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि यह एयरपोर्ट्स अथॉरिटी एक्ट की धारा 12 और 12-ए के तहत प्रदत्त शक्तियों से परे है और एयरक्रॉफ्ट रूल्स का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उच्चतम और निम्नतम बोली लगाने वालों के बीच 295 प्रतिशत से 638 प्रतिशत का विचलन है, जिसका अर्थ है कि एएआई द्वारा प्रसारित बोली दस्तावेज में स्पष्टता का अभाव था और बोली लगाने वाले परियोजना का विश्लेषण और मूल्यांकन करने में सक्षम नहीं थे।