मेकेदातु परियोजना पर बोले ये​डियुरप्पा: हमें पूरा हक है और हम काम शुरू करने जा रहे हैं

फोटो स्रोत: सीएम येडियुरप्पा ट्विटर अकाउंट।
फोटो स्रोत: सीएम येडियुरप्पा ट्विटर अकाउंट।

बेंगलूरु/भाषा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा ने मंगलवार को एक बार फिर कहा कि कावेरी नदी पर मेकेदातु परियोजना को लागू करने का राज्य को पूरा हक है और पड़ोसी तमिलनाडु की आपत्ति के बावजूद हम काम शुरू करेंगे।

उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ चर्चा की और राज्य में मेकदातु व अन्य सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र से मंजूरी मांगी।

मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु की आपत्ति से जुड़े एक सवाल के जवाब में येडियुरप्पा ने कहा, ‘मैं तमिलनाडु या किसी और राज्य के बारे में चर्चा नहीं करना चाहता। हमें पूरा हक है और हम काम शुरू करने जा रहे हैं।’

केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेकेदातु समेत राज्य में सिंचाई परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में हम सभी परियोजनाओं को पूरा करने जा रहे हैं और वह (केंद्रीय मंत्री) केंद्र से हर तरह से मदद देंगे…,उन्होंने हमें परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र से मंजूरी प्रदान करने के संदर्भ में सभी मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया है।’

कृष्णा न्यायाधिकरण फैसले की गजट अधिसूचना, मेकेदातु परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी, ऊपरी कृष्णा परियोजना, कलासा-बंडूरी नाला परियोजना, येत्तिनाहोल परियोजना के कार्यान्वयन समेत अन्य परियजोनाओं को लेकर चर्चा हुई।

राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को मेकेदातु परियोजना को लेकर स्थिति की जानकारी दी और उनसे मंजूरी का अनुरोध किया जो केंद्र सरकार के पास लंबित है।

उन्होंने कहा, ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दी गई है और इसे कावेरी निगरानी समिति को संदर्भित किया गया है, केंद्रीय मंत्री को पूरी मामले की जानकारी है और उन्होंने इस मामले को देखने व कर्नाटक के साथ न्याय का भरोसा दिया है।’

कर्नाटक की तरफ से यह बयान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कर्नाटक द्वारा मेकेदातु में बांध बनाए जाने के प्रयास की आलोचना करते हुए केंद्रीय सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी न देने का अनुरोध किया था।