पेट्रोल की कीमत 30 रुपए प्रति लीटर से अधिक नहीं हो सकतीं : सिद्दरामैया

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मैसूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्दरामैया ने केंद्र सरकार से मांग की है कि आयातित कच्चे ईंधन तेलों की मौजूदा कीमतों को देखते हुए पेट्रोल की कीमत 30 रुपए प्रति लीटर होनी चाहिए। उन्होंने ईंधन तेलों की कीमतों में पिछले 13 दिनों से की जा रही बढ़ोत्तरी के लिए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को दावा किया कि वर्तमान कच्चे तेल की दरों पर पेट्रोल 30 रुपए प्रति लीटर से अधिक दर पर नहीं बेचा जाना चाहिए। उन्होंने आज यहां ईंधन की कीमतों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ एक अभिनव विरोध प्रदर्शन की शुरुआत किया। इस प्रदर्शन में 100 से अधिक वाहन चालकों को मात्र 25 रुपए प्रति लीटर की दर पर पेट्रोल बेचा गया। इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमतें इस समय 39 डॉलर प्रति बैरल बस के आसपास हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कच्चा तेल प्रति बैरल 130 डॉलर की दर तक पहुंच चुका था। अगर प्रति बैरल क्रूड ऑयल 39 डॉलर में मिल रहा है तो एक लीटर पेट्रोल का मूल्य 18.60 रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘चूंकि सरकार 10 से 12 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से टैक्स लगाती है, तो इसकी कीमत 30 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।’

सिद्दरामैया ने खेद जताते हुए कहा कि ईंधन तेलों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब कोविड-19 ने लोगों की आर्थिक-वित्तीय कमर तोड़ दी है। उन्होंने केंद्र से ईंधन पर लगाए गए उत्पाद शुल्क को तुरंत कम कर आम जनता को राहत देने का आग्रह किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर न केवल लोगों के स्वास्थ्य, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी कोविड-19 महामारी से निपटने में भी पूरी तरह से विफल रहे हैं।

सिद्दरामैया ने अपने संबोधन के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत दिलाने में असहाय हैं। यहां तक, कि मुख्यमंत्री केंद्र से राज्य के हिस्से की धनराशि जारी करवाने में भी सक्षम नहीं हैं। वह मोदी से ईंधन की कीमतें कम करने के लिए कहने की हिम्मत नहीं करेंगे। कांग्रेस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री येडियुरप्पा प्रधानमंत्री मोदी की धुन पर नाच रहे हैं लेकिन उनमें यह हिम्मत नहीं है कि वह केंद्र से कर्नाटक में विकास कार्यों के लिए फंड हासिल कर सकें।