उडुपी के 23 वर्षीय विश्वनाथ देवाडिगा ने कंबाला दौड़ में बनाया नया रिकॉर्ड

कंबाला दौड़। फोटो स्रोत: PixaBay
कंबाला दौड़। फोटो स्रोत: PixaBay

उडुपी/दक्षिण भारत। हाल के वर्षों में कर्नाटक की पारंपरिक भैंसा दौड़ कंबाला धावकों द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड की वजह से सुर्खियों में है। उडुपी जिले के बिंदूर के 23 वर्षीय कंबाला धावक विश्वनाथ देवाडिगा ने पिछले शनिवार को आइकाला में 100 मीटर दौड़ में एक नया रिकॉर्ड बनाया जहां उन्होंने केवल 9.15 सेकंड में यह दूरी पूरी की।

वहीं श्रीनिवास गौड़ा पिछले साल 9.55 सेकंड में 100 मीटर दौड़ने पर छा गए थे जिसके बाद उनकी तुलना ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता उसेन बोल्ट के साथ की जाने लगी जिनका 100 मीटर विश्व रिकॉर्ड 9.58 सेकंड है।

अपनी इस उपलब्धि के बाद विश्वनाथ का कहना है कि वह उन लोगों के लिए आभारी हैं जिन्होंने उनके लिए यह संभव किया। विश्वनाथ को करबाला तालुक में माला गांव के करुणाचारी की याद आती है, जो एक कम्बाला धावक थे और उत्साही थे कुछ साल पहले एक कार्यक्रम में मिले थे।

मलाला में करुणाचारी का घर वह है जहां वे जब भी उनके जिले जाते हैं। वह कहते हैं कि बिंदूर से मुझे उनके घर जाने के लिए लगभग 130-150 किमी की यात्रा करनी होती है। इसलिए मैं शाम तक आधी दूरी तय कर रात भर करुणाचारी के घर पर रहता हूं और अगले दिन शेष आधे हिस्से की दूरी पूरी करता हूं।

वह कहते हैं कि जब मैं व्यायाम करता रहता हूं तो मैदान पर ज्यादा अभ्यास की जरूरत नहीं होती है। 6 फरवरी को विश्वनाथ इरुवथुर आनंद (9.57 सेकंड), अकेरी सुरेश शेट्टी (9.57 सेकंड), श्रीनिवास गौड़ा (9.55 सेकंड) और निशांत शेट्टी (9.51 सेकंड) सहित धावकों के कुलीन क्लब में शामिल हो गए। विश्वनाथ बचपन से ही कंबाला को देखकर बड़े हुए थे।

वह शुरुआती दिनों में मुंबई में एक कैंटीन में काम करते थे। हालांकि उन्हें शहरी जीवनशैली पसंद नहीं थी क्योंकि बचपन से ही घर के सभी सदस्य कृषि से जुड़े रहे हैं।