प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर चीनी फौज के हमले, सैनिकों द्वारा पलटवार, उनके घायल होने और 20 जांबाजों की शहादत सहित एलएसी की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों को लेकर शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक में प्रतिनिधियों से संवाद किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विषय पर आप सभी दलों ने जो विचार रखे हैं, वो बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। हम सभी देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात लगे हमारे वीर जवानों के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सर्वदलीय बैठक के माध्यम से मैं शहीदों के परिवारों को भी यह विश्वास दिलाता हूं कि पूरा देश उनके साथ है, पूरा देश उन्हें नमन करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में जो हुआ, इसको लेकर आपने रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को सुना भी और प्रजेंटेशन को भी देखा। न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख में हमारे 20 जांबाज शहीद हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता की तरफ आंख उठाकर देखा था, उन्हें वो सबक सिखाकर गए। उनका यह शौर्य, यह बलिदान हमेशा हर भारतीय के मन में अमिट रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर, चीन द्वारा एलएसी पर जो किया गया है, उससे पूरा देश आहत है, आक्रोशित है। यह भावना हमारी इस चर्चा के दौरान भी आप सबके माध्यम से बार-बार दिखाई दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आपको भी आश्वस्त कर रहा हूं कि हमारी सेना देश की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। डिप्लॉयमेंट हो, एक्शन हो, काउंटर एक्शन हो, जल-थल-नभ में हमारी सेनाओं को देश की रक्षा के लिए जो करना है, वो कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमारे पास यह सामर्थ्य है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता। आज भारत की सेनाएं अलग-अलग सेक्टर्स में एक साथ मूव करने में भी सक्षम हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में, हमने जहां एक तरफ सेना को अपने स्तर पर उचित कदम उठाने की छूट दी है, वहीं दूसरी तरफ डिप्लोमैटिक माध्यमों से भी चीन को अपनी बात दो टूक स्पष्ट कर दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति और मित्रता चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है और आप सबने भी इसी भावना को प्रकट किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में देश ने अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए बॉर्डर एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट को प्राथमिकता दी है। हमारी सेनाओं की दूसरी आवश्यकताओं, जैसे फाइटर प्लेन्स, आधुनिक हेलीकॉप्टर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम आदि पर भी हमने बहुत बल दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए बने हुए इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से खासकर एलएसी में अब हमारी पेट्रोलिंग की क्षमता भी बढ़ गई है। पेट्रोलिंग बढ़ने की वजह से अब सतर्कता बढ़ी है और एलएसी पर हो रहीं गतिविधियों के बारे में भी समय पर पता चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों पर पहले बहुत नजर नहीं रहती थी, अब वहां भी हमारे जवान अच्छी तरह से मॉनिटर कर पा रहे हैं, रिसपॉण्ड भी कर पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक जिनको कोई पूछता नहीं था, कोई रोकता-टोकता नहीं था, अब हमारे जवान डगर-डगर पर उन्हें रोकते हैं, उन्हें टोकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर से एक मदद यह भी मिली है कि हमारे जवान, जो उस कठिन परिस्थिति में वहां तैनात रहते हैं, उन्हें साजो-सामान पहुंचाने में, आसानी हुई है।

साथियो, राष्ट्रहित, देशवासियों का हित हमेशा हम सभी की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। चाहे ट्रेड हो, कनेक्टिविटी हो, काउंटर टेरेरिज्म हो, भारत ने कभी किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जो भी ज़रूरी कार्य हैं, जो भी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है, उसे इसी तरह तेज गति से आगे भी किया जाता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आप सभी को, सभी राजनीतिक दलों को फिर से आश्वस्त करता हूं कि हमारी सेनाएं सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमने उन्हें यथोचित कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी ने इस बैठक के लिए अपना समय दिया, अपने मूल्यवान सुझाव दिए, इसके लिए मैं सभी दलों का, आप सभी नेतृत्वगण का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।