सांसद राजीव चंद्रशेखर
सांसद राजीव चंद्रशेखर

सांसद राजीव चंद्रशेखर ने कर्नाटक की उत्कृष्ट आर्थिक और अभिनव स्थिति को रेखांकित किया

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कोविड-19 और बदले हालात में अमेरिका-चीन संबंधों ने विश्व व्यापार के दृष्टिकोण को प्रभावित किया है। दुनिया अब अपने व्यापार की संभावना को फिर से हासिल करना चाहती है, विशेष रूप से आपूर्ति शृंखला, कई देश निवेश को सुरक्षित और संभावित स्थानों पर स्थानांतरित कर रहे हैं। इन सबके बीच, भारत सबसे पसंदीदा देश के रूप में उभरा है। पारस्परिक रूप से, भारत ने इस अवसर पर संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। देश में कर्नाटक उत्कृष्ट आर्थिक संभावनाओं वाला राज्य बन गया है।

कर्नाटक सरकार ने राज्यभर में विनिर्माण हब स्थापित करने की योजना बनाकर अवसरों को नया आकार दिया है। कर्नाटक की नई औद्योगिक नीति उच्च तकनीकी निवेश को प्रोत्साहित कर स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ाती है, और राज्य की राजधानी से परे औद्योगिक और प्रौद्योगिकी हब को स्थानांतरित करने का प्रयास करती है। प्रोत्साहित किए गए क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, ज्ञान-आधारित उद्योग, इलेक्ट्रिक वाहन और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं, जिनमें से कुछ ने जर्मनी सहित कई देशों को आकर्षित किया है।

जर्मनी और भारत की ओर से एक वर्चुअल कार्यक्रम ‘इंडिया बिजनेस डे 2020, जर्मनी’ में इन अवसरों पर चर्चा की गई। यह कार्यक्रम यूरोप-एशिया बिजनेस कनेक्ट द्वारा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज मैगडेबर्ग एवं इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ ऑनलाइन आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में सांसद राजीव चंद्रशेखर मुख्य वक्ता थे। यह कार्यक्रम कर्नाटक और जर्मनी के राज्य साचसेन-एनलॉट के बीच कोरोना के बाद विश्व में नए व्यापारिक संबंधों की खोज और निर्माण पर केंद्रित था।

सांसद राजीव चंद्रशेखर, जो वित्त और सार्वजनिक खातों पर संसदीय समिति के सदस्य भी हैं, ने कर्नाटक की उत्कृष्ट आर्थिक और अभिनव स्थिति को रेखांकित किया। इस अवसर पर कर्नाटक की उद्योग आयुक्त गुंजन कृष्णा ने एक प्रजेंटेशन के जरिए नीतिगत प्राथमिकताओं और निवेश के अवसरों के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी।

इसी प्रकार, डसेलडोर्फ में स्थित इंडो-जर्मन चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख डर्क मैटर ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति के बारे में प्रजेंटेंशन दिया। फ्रांज़ीस्का रोएटर ने बताया कि कैसे भारत सरकार, जर्मन सरकार और यूरोपीय संघ स्टार्ट-अप के लिए व्यावसायिक गतिविधियों का समर्थन करते हैं।