उत्तर कर्नाटक में विकास की अनदेखी के खिलाफ सुवर्ण विधानसौधा पर संतों का धरना

उत्तर कर्नाटक में विकास की अनदेखी के खिलाफ सुवर्ण विधानसौधा पर संतों का धरना

बेलगावी/दक्षिण भारतउत्तरी कर्नाटक के विभिन्न धार्मिक मठों के ३० से अधिक संतों और महंतों ने मंगलवार को सरकार की ओर से इस क्षेत्र की हो रही अनदेखी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यहां स्थित सुवर्ण विधानसौधा भवन के सामने बैठकर समाज के इन सम्मानित धर्मगुरुओं ने पिछली कई सरकारों द्वारा लगातार क्षेत्र की अनदेखी किए जाने का मुद्दा उठाया। इस कथित अनदेखी से तंग आकर विभिन्न छात्र, किसान और सामाजिक संगठनों की ओर से २ अगस्त को उत्तर कर्नाटक के १३ जिलों को मिलाकर कर्नाटक से अलग राज्य का गठन करने की मांग पर आहूत बंद की पृष्ठभूमि में संतों का यह विरोध प्रदर्शन काफी महत्वपूर्ण हो गया है। बहरहाल, इन संतों का स्पष्ट कहना था कि वह इस क्षेत्र को अलग राज्य का रूप देने का समर्थन नहीं करते, बल्कि वह चाहते हैं कि राज्य सरकार कई दशकों से उपेक्षित उत्तर कर्नाटक के समग्र विकास पर उचित ध्यान दे। प्रदर्शनकारी धर्मगुरुओं ने राज्य की मौजूदा जनता दल (एस) और कांग्रेस की मिली-जुली सरकार की अगुवाई कर रहे मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को चेतावनी दी कि अगर पूरे क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य शुरू न किया गया तो उनका विरोध प्रदर्शन एक नए आंदोलन का रूप ले लेगा और इसके नतीजों के लिए पूरी तरह से राज्य सरकार ही जिम्मेदार होगी। वहीं, प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करने के लिए बेलगावी पहुंचे विधानसभा में विपक्ष के नेता बीएस येड्डीयुरप्पा ने इनके साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूर्ण समर्थन होने की बात कही। इसके साथ ही कहा कि भाजपा कर्नाटक को टुक़डों में बांटने के किसी भी आंदोलन को अपना समर्थन नहीं देगी। २ अगस्त को आहूत बंद को भी इस पार्टी का समर्थन नहीं मिलेगा। येड्डीयुरप्पा ने कहा, ’’मैं बंद का आह्वान करने वाले संगठनों से अपील करना चाहूंगा कि वह अपना आह्वान वापस ले लें क्योंकि अलग राज्य के गठन से उनकी किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मैं उन्हें आश्वासन देता हूं कि भाजपा विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों स्थानों पर उत्तर कर्नाटक क्षेत्र के समग्र विकास के लिए संघर्ष करेगी।’’ वहीं, भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के रूप में प्रदर्शन से इतर पत्रकारों से बातचीत में येड्डीयुरप्पा ने कहा, ’’पिता और पुत्र की जो़डी अपना स्वार्थ साधने के लिए कर्नाटक को बांटने की मांग को हवा दे रही है। एक मुख्यमंत्री के रूप में कुमारस्वामी को यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि इस इलाके के मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्अी को अपना समर्थन नहीं दिया।’’वहीं, येड्डीयुरप्पा ने इसे एक और राजनीतिक घुमाव देते हुए जनता दल (एस) के साथ मौजूदा गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस के नेताओं से मांग की कि वह इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष आम जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा, ’’अगर वह पार्टी इसके (अलग उत्तर कर्नाटक राज्य की मांग के) खिलाफ है तो इसे मुख्यमंत्री के बयानों के खिलाफ गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में कांग्रेसी सांसदों के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरामैया के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेता इस मुद्दे पर गठबंधन सरकार की हो रही तीखी आलोचना के बावजूद चुप्पी ओ़ढ रखी है। उन्हें खुलकर यह बात कहनी चाहिए कि कांग्रेस पार्टी विकास के मामले में किसी भी क्षेत्र की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी।

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